बरसाना-नंदगांव की लठमार होली में जाने से पहले इन बातों को जान लीजिए

होली शब्द सुनते ही मेरे मन में बचपन की कई तस्वीरें उभरने लगती हैं। बचपन में दस लड़कों के बीच में अकेली लड़की थी जो होली खेलती थी। ईसाई होने के बावजूद भी मेरे पापा सबसे बड़ी पिचकारी मुझे ला कर देते थे। गुब्बारों और रंगों का तो ढेर हुआ करता था मेरे पास। सुबह 8 बजे से लेकर दोपहर 1 बजे तक होली खेली जाती थी। न कोई छेड़छाड़, न कोई बदतमीजी। होली खेलने का मजा दोगुना हो जाया करता था उस वक्त। इसी होली को दोबारा जीने के लिए मैं बरसाना-नंदगांव की लठमार होली के लिए रवाना हुई। उम्मीद तो थी कि बरसाना में होली का नया रूप देखने के लिए मिलेगा। मिला भी पर कुछ खट्टे-मीठे अनुभवों के साथ। उन्हीं अनुभवों को मैं आपके साथ साझा करूंगी, ताकि आप भी जान सकें कि बरसाना और नंदगांव की लठमार होली में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए वरना हमारी तरह भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

बरसाना के लड़के, जो लड़कियों पर निशाना साध रहे थे

बुरा मानों, चाहे होली है

बरसाना पहुंचते ही हमारी होली की शुरुआत हो जाती है। वहां हर गली, घर के बाहर बच्चे पिचकारी लेकर खड़े रहते हैं। वहां कई ऐसे लोग भी मिलेंगे जो होली के नाम पर छेड़छाड़ करने की कोशिश करेंगे। पर इस बात का ध्यान रखें कि ऐसी किसी भी हरकत के खिलाफ आवाज जरूर उठाएं। हो सकता है इस तरह की घटना किसी दूसरे के साथ हो, आपके साथ नहीं। पर किसी के साथ भी हो उसके खिलाफ अपना प्रतिरोध दर्ज करें। वहां तैनात पुलिसकर्मियों की मदद लें, उन्हें इस बात की सूचना दें कि फलां जगह पर अराजक तत्व घेरावकर होली के मौके का गलत फायदा उठा रहे हैं। कई बार कुछ लोकल लोग भी इन छेड़छाड़ करने वालों को शह देते हैं, इस कारण ऐसे लोगों को और बढ़ावा मिलता है। आप बस ये सोचिए, आपका एक बार आवाज न उठाना, किसी लड़की के लिए जीवन भर का बुरा अनुभव हो सकता है।

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कैमरे को वॉटरप्रूफ कपड़े पहनाना न भूलें

कैमरे का रखें ज्यादा ख्याल

कैमरा बहुत नाजुक चीज है और अगर आपको भी हमारी तरह अपने कैमरे से बेशुमार प्यार है तो उसे रेनकोट पहनाकर जाएं। कैमरे को रंग और पानी की बारिश से बचाने की पूरी तैयारी करके जाएं। पूरा ध्यान रखें कि कैमरे को पानी और रंग छू ना पाए। बरसाना और नंदगांव दोनों ही जगह इतना रंग और पानी का इस्तेमाल होता है कि कैमरे बेचारे की तो शामत आ जाती है। मैं कैमरे की सुरक्षा पर इतना ध्यान इस दिलवा रही हूं क्योंकि मेरा एक कैमरा वहां खराब हो चुका है। कुछ अतिउत्साही लड़कों की अतिवादी होली की वजह से हमारे कैमरे में पानी चला गया था जिसके कारण पूरे सफर में वो चल ही नहीं पाया। वहां रंग और पानी कहां से आ जाए इसका कोई अनुमान नहीं। इसलिए कैमरे का विशेष ख्याल रखें और उसे पॉलीथीन का एक वॉटरप्रूफ जैकेट पहनाना न भूलें, वरना हजारों का नुकसान उठाने के लिए तैयार रहें।

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पॉकेटमारों से विशेष सावधान

इस फुल मस्ती वाले माहौल में कई लोग मौके पर चौका मारने के लिए तैयार रहते हैं तो अपने जेब और बैग्स का ध्यान रखें। भीड़-भाड़ में कोई भी आपकी जेब पर चपत लगा सकता है। राधारानी मंदिर में एक इंसान परेशान था क्योंकि कोई उनका वॉलेट और फोन दोनों ही मार ले गया था। बैग की सबसे आगे वाली चेन में अपने कीमती सामान कभी न रखें। हो सके तो बैग में ताला लगा लें ताकि आपकी मौज में कोई खलल न आए। कई लोग होंगे जो भीड़ की आड़ में आपको गलत तरीके से छूने से भी नहीं चूकेंगे। तो ख्याल रहे मस्ती और बदतमीजी में फर्क को समझें और उसे ऐसे ही जाने न दें। सतर्क रहें। होली खेलें पर उसे बदरंग करने वाले लोगों से सचेत रहें।

सावधानी हटी, दुर्घटना घटी

भीड़ के प्रकोप से बचकर रखें

बरसाना और नंदगांव में बहुत ज्यादा तादाद में लोग होली खेलने के लिए आते हैं। दिल्ली से नजदीक होने की वजह से स्थानीय लोगों के अलावा पर्यटकों और मीडिया की भी भारी भीड़ पहुंचती है। लठमार होली में भीड़ बहुत तेजी से इधर-उधर भागती है। होली का मजा लेने के लिए कोई सुरक्षित स्थान जरूर पकड़ लें वरना भीड़ आपको अपने साथ घुमाएगी और आप चाह कर भी कुछ नहीं कर पाएंगे। न ठीक से मजा ले पाएंगे और न होली खेल पाएंगे। और हां एक्सट्रा कपड़े जरूर रख लें। ताकि पानी से तर-ब-तर आप अगले दिन बुखार की चपेट में न आ जाएं।

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नंदगांव की लाठियां बरसातीं महिलाएंं

पहले से कर लें धर्मशाला-होटल की बुकिंग

बरसाना-नंदगांव की होली दो दिनों तक चलती है। पहले दिन बरसाना में, दूसरे दिन नंदगांव में। वहां से वृंदावन तकरीबन तीस-चालीस किलोमीटर दूर है। मैंने वृंदावन में होटल लिया था और फिर बाद में पछता रही थी। बरसाना की होली खेलकर मुझे अपने होटल लौटना पड़ा था क्योंकि बरसाना में मौके का फायदा उठाकर कमरों का दाम बहुत बढ़ा दिया था लोगों ने। बरसाना की होली में ही इतना थक गए थे कि वहां से रात में तीस-चालीस किलोमीटर लौटना और अगले दिन फिर उतना ही सफर करके वापस नंदगांव आना बेवकूफी है। इसलिए पहले से ही बरसाना या नंदगांव में अपने लिए कमरा बुक करवा लें।


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