वाशी का सी-शोर: मुंबई का छोटा सा सुकून वाला कोना

कहते हैं कि मायानगरी मुंबई कभी शांत नहीं होती, यहां कभी रात नहीं होती। चकाचौंध भरी इस मायानगरी मुंबई में कई ऐसी जगहें हैं, जहां आप सुकून की तलाश में पहुंच सकते हैं। मुझे मुंबई आए 3 साल से ज्यादा वक्त हो गया है। मुंबई की अधिकतर जगह घूम चुकी हूं।

मुंबई में सुकून की तलाश

शुरुआत में साउथ बॉम्बे में रहने के दौरान जब शांति चाहिए होती थी या सुकून भरे अकेले में कुछ पल बिताने होते थे। तो मैं मुंबई के वर्ली सीफेस या मरीन ड्राइव चली जाती थी। लेकिन नवी मुंबई में शिफ्ट होने के बाद मुझे ऐसी कोई जगह नहीं मिली।

फिर मैंने लॉकडाउन में होम क्वारंटाइन में रहने के दौरान थोड़ा रिसर्च किया और मुंबई के लोकल लोगों से बात कि जिन्होंने बताया की वाशी में सी-शोर एक जगह है। जहां बहुत शांति रहती है और सुकून के साथ समंदर की लहरों को निहारते आप खुद से बाते कर सकते हैं।

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मुंबई का सी-शोर

वीक ऑफ वाले दिन, मैंने एक ऑटो हायर किया। जिसने मुझे आने-जाने  के 300 रुपए बताया। लगभग आधे घंटे में मैं उस जगह पहुंच गई। इतनी खूबसूरत और शांत भरी जगह देखकर पहले तो मैं हैरान हो गई। समंदर के इतने करीब लहरों का सामना मैंने बहुत दिनों बाद किया था। समंदर के किनारों पर नाव लगी हुई थी, मानो लॉकडाउन के कारण को भी क्वारंटाइन सी हो गई हो।

कई मछुआरों को रोजगार देने वाला ये समंदर भी बेहद शांत सा हो गया था। वहां कुछ लोग मिले जो फोटो ले रहे थे। वीडियो बना रहे थे।  मैंने भी कुछ फोटो निकाली पर ये वो जगह नहीं थी, जो मैंने गूगल पर पढ़ी थी और देखी थी।

सी-शोर गार्डन

सुकून के पलों में फोन ऑफ होने को दुख

वहां लोकल लोगों से बात कि और ऑटो वाले को सी शोर ले जाने को कहा। वहीं से कुछ दूरी पर था वो गार्डन। वहां बहुत भीड़ थी। कई दोस्तों की टोली थी और कुछ कपल भी थे। खाने-पीने के स्टाल्स थे, सेल्फी कार्नर थे, यहां समंदर तो नहीं था। लेकिन छोटी सी झील थी। जिसके चारों तरफ टहलने के लिए सीढ़ियां थी। मैं सीढ़ी से उतरकर टाइम लैप्स बना ही रही थी कि फोन बंद हो गया।  इतना बुरा कभी नहीं लगा था। बस फिर क्या, ऑटो वाले को बुलाया और वापस गई। इस वादे के साथ कि जल्द आकर वीडियो बनाउंगी।

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(ये ब्लॉग ‘चलत मुसाफ़िर’ के साथ इंटर्नशिप कर रहीं शिल्पी ने संपादित किया है)


वाशी सी-शोरइस टूरिस्ट स्पॉट के बारे में ये तमाम बातें हमें लिख भेजी हैं शालू अवस्थी ने। शालू पत्रकार हैं। शालू बताती हैं कि अब तो हर वीकेंड निकल लेती हैं कहीं न कहीं घूमने। धुन सवार है कि जितना घूम सकें उतना घूम डालें, बस घूम डालें। स्वादिष्ट व्यंजनों में जान बसती है। फोटो खिंचवाना पसंदीदा शगल है। चाहती हैं कि इस ब्रह्मांड के सभी लोग झोला उठाकर घूमने निकल पड़ें।

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