मालगुड़ी डेज को जीवंत देखना चाहते हैं तो केरल आएं

मैं छुट्टियां बिताने के लिए जगह तलाश रही थी। मेरी लिस्ट में केरल का नाम सबसे ऊपर था। थोड़े सोच-विचार के बाद मैंने केरल जाना ही फाइनल कर लिया। पूरे सात दिनों का ट्रिप प्लान बनाया था। लेकिन बारिश ने अचानक ही दस्तक दे दी। सातों दिन तक वर्षा रानी हम पर मेहरबान रहीं। लेकिन हम भी कहां रुकने वाले थे। उसी बारिश में घूमने का शानदार फैसला लिया गया।
कोच्चि पोर्ट

कोच्चि किला

एक हफ्ता हमें केरल में बिताना था। सातवें दिन त्रिवेंद्रम से हमारी वापसी कि टिकट थी। मेरा प्लान था कि हम केरल के सारे कोस्ट देखेंगे पर बिना ज्यादा खर्चा किए। सफर के लिए हमने लोकल ट्रांसपोर्ट को चुना। कोई मंहगे होटल नहीं, कोई मंहगे फालतू के खर्चे नहीं। ख्याल तो यही था कि जो दिल में आएगा वो करेंगे। जहां चाहेंगे वहां रहेंगे। जो मन करेगा, वो खाएंगे। जहां जितना मन करेगा, रुकेंगे।
कोच्चि का मजा लेता मेरा भाई

हाफ प्लान्ड ट्रिप की शुरुआत

हम कोच्चि एयरपोर्ट पर खड़े थे और खोज रहे थे घूमने की जगह। गूगल से पता चला कि एयरपोर्ट से 4 घंटे की दूरी पर ही है कोच्चि किला। एयरपोर्ट से कोच्चि किले के लिए डायरेक्ट बस जाती है। जो काफी किफायती और आरामदायक है। बस पतले-पतले रास्तों में आगे बढ़ती जा रही थी। जब मैने केरल आने का प्लान बनाया था, तब मेरे दिमाग में बस यही था कि केरल की घुमाई करेंगे और प्राकृतिक दृश्यों का आनंद लेंगे। पर केरल सिर्फ प्राकृतिक दृश्य तक सीमित नहीं है।
सच्चाई तो यह है कि केरल प्राकृतिक दृश्यों से कहीं ज्यादा है, लोगों के बारे में हैं। केरल का महत्व उसके खाने, संस्कृति और आदर्शों से और भी बढ़ जाता है। जैसे वहां के लोग मदद के लिए आगे आते हैं, वो दिल छू जाता है। भाषा में भिन्नता के बावजूद वो कोशिश करते हैं हमारी बात समझने की। बिना मदद मांगे भी हमेशा तैयार रहते हैं आपकी मदद करने के लिए।
आर के नारायण की दुनिया

आर के नारायण का मालगुडी डेज

कोच्चि किला एक बहुत ही छोटे से द्वीप पर बना है। जो इर्नाकुलम ब्रिज से शहर जुड़ा हुआ है। बोट्स कम दामों में काफी मजेदार साधन है वहां तक पहुंचने का। कोच्चि किला एक पोर्ट है इसलिए हमें वो शानदार समुद्र तट नहीं मिले जैसे हमने सोचे थे। अगर आप आस-पास अपनी नजर दौड़ाएंगे या आपने कभी आर. के. नरायण की मालगुडी डेज पढ़ी है तो आपको इस शहर से प्यार हो जाएगा। आस-पास घूमते छोटे बच्चों में आपको स्वामी जरूर दिखेगा।
नारियल पेड़ों के साथ छोटे-छोटे घर। पतले-पतले रास्ते। जो बारिश हमें अब तक परेशान कर रही थी वो अब उस दृश्य को और सुंदर बना रही थी। कभी-कभी होती छिटपुट बारिश के कारण हमें कोच्चि से और भी ज्यादा प्यार होने लगा था। केरल कभी बारिश के कारण रूकता नहीं है। पर्यटकों को दुनिया से जुदा एक अलग ही दुनिया देखने को मिलती है यहां।
उससे भी जरूरी बात यह है कि केरल के रेस्टोरेंट में आपको खाना मंहगा जरूर लगेगा। अगर रेस्टोरेंट की जगह केरल के स्ट्रीट फूज ट्राई करेंगे तो ज्यादा फायदे में रहेंगे। केरल के स्ट्रीट फूड मछली, चिकन जैसे पकवान खाने में स्वादिष्ट और किफायती हैं। केरल विदेशी पर्यटकों में काफी प्रचलित है। 3 स्टार वाले होटल, लॉज, कॉटेज और बैगपैकर्स के लिए होस्टल। पर मेरी पहली पसंद में से एक है हॉस्टल। हॉस्टल आपको मौका देगा वहां के लोगों से मिलने का और केरल के करीब आने का।

आयुर्वेदिक चिकित्सा का स्वर्ग

कोच्चि किले के अलावा केरल में कई प्राचीन मंदिर और चर्च हैं। इतिहास प्रेमियों के लिए ये जगह स्वर्ग से कम नहीं है। शांति की खोज करने वाले लोगों के लिए केरल बेहतरीन जगह है। जो लोग खुद के साथ और दूसरों के साथ क्वालिटी टाईम बिताना चाहते हों तो वो केरल जरूर आएं। लेखकों, पाठकों और चिकित्सा के लिए आए लोगों के लिए केरल स्वर्ग से कम नहीं।

केरल अपने आयुर्वेदिक चिकित्सा के लिए भी काफी प्रचलित है। मैं आपको सलाह देना चाहूंगी, अगर आप केरल आएं तो शहर में यूं ही घूमने निकल जाएं और प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लें। मसालों की सड़क, दा पोर्ट, डच के द्वारा बनाए गए घर, तालाब, मंदिरों और चर्चों में जाते लोग और हराभरा वातावरण। मैं अब तक जहां भी घूमी हूं, केरल उनमें सबसे बेस्ट जगह है।

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स्टोरी हमें लिख भेजी है।अवनिंदर कौर वैसे तो सरकारी मुलाजिम हैं लेकिन नौकरी की बोगस हवा इन्हें छू नहीं पाई है। फुल ऑन जिंदगी से भरी रहती एक लड़की, जिसके दिल में सभी के लिए बहुत सा प्यार भरा है। मॉर्डन है और रिश्तों को दिल से निभाने में विश्वास रखती हैं। नई भाषाएं सीखने का भी बहुत शौक है। फिलहाल उर्दू और फ्रेंच सीख रही है। घूमने के लिए हर वक्त तैयार रहती हैं, चाहे वो चांदनी चौक हो या भूटान। 

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