कहां है हनुमान की 108 फीट ऊंची मूर्ति

जाखू मंदिर हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। पहाड़ी पर राज्य सरकार द्वारा विभिन्न ट्रैकिंग और पर्वतारोहण गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। जाखू मंदिर की चोटी से शिमला शहर का नज़ारा देखने का आनंद ही कुछ और है। यहां आने वाले पर्यटक 2100 मीटर से अधिक की ऊंचाई से कई किलोमीटर दूर तक परमपिता की अद्भुत चित्रकारी का आनंद उठा सकते हैं।

बनारस की वो चीज जिसे देखने के लिए दुनिया भर से लोग खिंचे चले आते हैं

बनारस की गंगा आरती पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। दुनियाभर से लोग बनारस के घाटों को देखने आते हैं। वैसे गंगा के कई घाटों पर आरती होती है लेकिन राजेन्द्र घाट पर होने वाली संध्या आरती बहुत शानदार होती है। आरती देखने के लिए देशी-विदेशी पर्यटकों के साथ वीवीआईपी, सेलिब्रेटीज भी आते हैं। आरती के शुरू होने से अंत होने तक एक अलौकिक वातावरण सा बंध जाता है। आरती खत्म होने पर लोग गंगा से एक जुड़ाव महसूस करने लगते हैं।


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गंगा-वरुणा के संगम पर बनी एक मजार, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं

बनारस में गंगा-घाटों के बारे में सबने बहुत सुना है। गंगा के पहले घाट ‘आदिकेशव’ के पास है चंदन सयैद की मजार। वहां आने वाले लोगों का मानना है  कि चंदन सयैद ने मजहब और मानवता के लिए बड़ी-बड़ी कुर्बानियां दी है। इस जगह के बारे में बहुत कम लोगों को ही जानकारी है। यहां जो जोड़ी कव्वाली गायी जाती है उसका तो जवाब नहीं। आवाज ऐसी कि रूह छू जाए। इस जुगलबंदी को सुनकर कई लोग तो अपने आंसू रोक ही नहीं पा रहे थे।


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बनारस में होने वाली सूर्योदय आरती है भारत में सबसे अलग

बनारस में सूर्योदय की आरती अस्सी घाट पर होती है। यहां होने वाली आरती भारत में होने वाली सभी आरतियों से अलग है। यहां मंत्रोच्चारण लड़कियां करती है। पाणिनि कन्या महाविद्यालय की अध्यापिका इस आरती का नेतृत्व करती हैं। इन्हीं की निगरानी में सुबह का यज्ञ भी होता है। लड़कियों की मीठी आवाज से रोज सुबह सूर्य को आवाह्न दिया जाता है।


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लखनऊ आएं तो राहुल के ठेले पर आना न भूलें

लखनऊ के चौक पर जाइए। वहां से पास में ही है अकबरी गेट। तीन गलियां आगे जाकर मिलेगा आपको राहुल का ठेला। जहां आपकी नवाजिश की जाती है सात मसाले वाले गोल गप्पे से। हींग से लेकर सौंफ वाले मसालों के गोल गप्पे.. आहा! वैसे तो ये छोटा सा ठेला है पर यहां आने वाले ग्राहकों की कमी नहीं। चटोरपंथी का एक ही ईमान है और वो है मजेदार स्वाद।


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बोकारो

बोकारो: एक उद्योग नगरी जो रात के नौ बजते ही सो जाती है

झारखंड स्वर्ण जयंती एक्सप्रेस नई दिल्ली स्टेशन से 22 घंटे की यात्रा पूरी कर एक स्टेशन पर रुकती है। बाहर झांकने पर प्लेटफॉर्म के आखिरी छोर पर पीले रंग का एक बड़ा से चौकोर बोर्ड दिखा। इस पर काले रंग से लिखा था बोकारो स्टील सिटी।

मेघालय

इस दुनिया से जुदा, अप्रतिम खूबसूरती से भरा मेघालय

मेघालय की खूबसूरत धरती, सुंदर जलप्रपातों, पहाड़ों के भीतर-बाहर घुमक्कड़ी. डबल डेकर ब्रिज, मॉस्माई गुफाओं, डौकी नदी के बारे में विस्तृत जानकारी.

उत्तराखंड

उत्तराखंड: शहर जकड़ता है, हम जी छुड़ाकर पहाड़ों पर भागते हैं

उत्तराखंड के ऋषिकेश, गुप्तकाशी, केदार घाटी में बिताए गए शानदार पल. शहर की बंद हवा से निकलकर पहाड़ों की आगोश में जाना हमेशा उत्साह बढ़ाने वाला है.

मगहरः जहां कबीर ने लाया सभी धर्मों को एक जगह

मेरा शहर या कहूं एक छोटा सा कस्बा मगहर। कबीर का शहर मगहर, साम्प्रदायिक सौहार्द का नगर मगहर, अपना हम सबका प्यारा घर मगहर। तुम्हें पता है मित्र, जब सुबह की बांग देते मुर्गों के बीच हमें अजान, घंट-घडियाल और कबीर के दोहों का मिश्रित धुन सुनाई देता है, मां कसम पूरा दिन बन जाता है। इस बने हुए दिन को मीठा बनाती है कुमार हलवाई की लबालब चासनी से भरी जलेबी,बशर्ते इसके लिए तुम्हे बहुत मशक्कत करनी पड़ सकती है। मित्र,कुमार हलवाई की जलेबी इतनी फेमस है कि भोर से ही लम्बी लाइन लग जाती है। बाकी दिन के इस मीठे आगाज़ को खूबसूरत अंजाम देने के लिए हमारा ‘कबीर चौरा’ है ही।

कबीर चौरा, जहां पर प्रसिद्ध फक्कड़ संत कबीर दास ने निर्वाण प्राप्त किया था। बताते हैं कि कबीर के समय यह मिथक प्रचलित था कि जो बनारस में मरता है वह स्वर्ग को प्राप्त होता है, वहीं जो मगहर में मरता है वह नरक को जाता है। कबीर, जो आडम्बर, पाखंडों और मिथकों को तोड़ने वाले माने जाते थे, ने इस मिथक को भी तोड़ने का संकल्प लिया और अपने जीवन का अंतिम कुछ समय मगहर में ही बिताया।

“क्या काशी क्या उसर मगहर, जो पाई राम बस मोरा,

जो काशी तन तजै कबीरा, रामहि कौन निहोरा।”

आमी नदी

आमी नदी

कबीर-चौरा, आमी नदी के तट पर स्थित एक विशाल सा प्रांगण, जहां पर कबीर दास की गुफा स्थित है। यहाँ एक तरफ शिव मंदिर है तो दूसरी तरफ जामा मस्जिद भी, एक तरफ कबीर की समाधि भी है, तो दूसरी तरफ मजार भी।अपने इन विशिष्ट स्थापत्यों के लिए कबीर-चौरा पूरे क्षेत्र में साम्प्रदायिक सौहार्द का एक अद्भुत प्रतीक माना जाता है।

कबीर की समाधि

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जोशीमठ-औली रोपवे है एशिया का दूसरा सबसे लंबा गंडोला टूर

मजेदार जगह है औली और उससे भी मजेदार है, जोशीमठ से औली तक का गंडोले पर सफर। इस रोमांचक रोपवे से गुजरकर जब आप औली की हसीन वादियों में पहुंचते हैं तो अल्लाह कसम, वहां से लौटकर आने का मन तो कतई नहीं करता। लेकिन लौटते वक्त रस्सी पर लटकी चेयरकार से जब सरकते हुए नीचे की तरफ आते हैं तो वापस आने की मजबूरी कम कचोटती है।


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हब्शी हलवा सर्दियों में मिलने वाली एक मिठाई है, जिसे बनाने में तकरीबन आठ घंटे लगते हैं। इसे दूध, खूब सारे घी, बहुत सारे ड्राई फ्रूट के साथ बनाया जाता है। यह केवल अक्टूबर से मार्च के बीच में ही मिलता है। इसलिए इसकी बुकिंग पहले से ही हो जाती है। देश ही क्या देश से बाहर भी इसकी बहुत डिमांड है।