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मंडी, हिमाचल प्रदेश: डरावने रास्ते, 8वीं सदी की एक गुफा

मंडी, हिमाचल प्रदेश | अगर आप रोमांच के खोजी हैं तो हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में जरूर आएं। मंडी में एक ऐसी जगह भी है जिसके बारे में लोग बहुत कम जानते हैं, एक रहस्यमयी बौद्ध गुफा। रेवाल्सर नगर पंचायत से कुछ ही दूरी पर है यह बौद्ध गुफा। यहां जाते वक्त लोगों के मन में एक अजीब सा डर बना रहता है। ज्यादातर लोग वहां जाने से कतराते हैं।

गुफा को और भी रहस्यमय बनाता है वहां तक जाने वाला रास्ता। कई लोग तो आधे रास्ते से ही वापस लौट आते हैं। लेकिन हम गए और स्टोरी भी की। वीडियो देखिए और सबको दिखाइए। और हां, सब्सक्राइब करना मत भूलिए हमारा यूट्यूब चैनल।


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मगहरः जहां कबीर ने लाया सभी धर्मों को एक जगह

मेरा शहर या कहूं एक छोटा सा कस्बा मगहर। कबीर का शहर मगहर, साम्प्रदायिक सौहार्द का नगर मगहर, अपना हम सबका प्यारा घर मगहर। तुम्हें पता है मित्र, जब सुबह की बांग देते मुर्गों के बीच हमें अजान, घंट-घडियाल और कबीर के दोहों का मिश्रित धुन सुनाई देता है, मां कसम पूरा दिन बन जाता है। इस बने हुए दिन को मीठा बनाती है कुमार हलवाई की लबालब चासनी से भरी जलेबी,बशर्ते इसके लिए तुम्हे बहुत मशक्कत करनी पड़ सकती है। मित्र,कुमार हलवाई की जलेबी इतनी फेमस है कि भोर से ही लम्बी लाइन लग जाती है। बाकी दिन के इस मीठे आगाज़ को खूबसूरत अंजाम देने के लिए हमारा ‘कबीर चौरा’ है ही।

कबीर चौरा, जहां पर प्रसिद्ध फक्कड़ संत कबीर दास ने निर्वाण प्राप्त किया था। बताते हैं कि कबीर के समय यह मिथक प्रचलित था कि जो बनारस में मरता है वह स्वर्ग को प्राप्त होता है, वहीं जो मगहर में मरता है वह नरक को जाता है। कबीर, जो आडम्बर, पाखंडों और मिथकों को तोड़ने वाले माने जाते थे, ने इस मिथक को भी तोड़ने का संकल्प लिया और अपने जीवन का अंतिम कुछ समय मगहर में ही बिताया।

“क्या काशी क्या उसर मगहर, जो पाई राम बस मोरा,

जो काशी तन तजै कबीरा, रामहि कौन निहोरा।”

आमी नदी

आमी नदी

कबीर-चौरा, आमी नदी के तट पर स्थित एक विशाल सा प्रांगण, जहां पर कबीर दास की गुफा स्थित है। यहाँ एक तरफ शिव मंदिर है तो दूसरी तरफ जामा मस्जिद भी, एक तरफ कबीर की समाधि भी है, तो दूसरी तरफ मजार भी।अपने इन विशिष्ट स्थापत्यों के लिए कबीर-चौरा पूरे क्षेत्र में साम्प्रदायिक सौहार्द का एक अद्भुत प्रतीक माना जाता है।

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