सबरीमाला मंदिर: कहानी शिव और ‘विष्णु’ के पुत्र अय्यप्पन की

आज शिव की कथाओं से गुजरते हुए अय्यप्पन से परिचय हुआ। वे केरल वासियों के बड़े देव हैं, सबरीमाला मन्दिर मुख्यतः उन्हीं का मंदिर है। और यह भी पता चला कि उनका जन्म शिव और मोहिनी रूपी विष्णु के संयोग से हुआ है।

इस कथा का वर्णन कई पुराणों में अलग अलग तरीके से है। यहां तक कि बौद्ध कथाओं में भी है। कथा यूं है कि भोले भाले शिव ने भस्मासुर को वरदान दे दिया था कि वह जिसके सिर पर हाथ रखेगा वही भस्म यानी राख में बदल जायेगा।

वरदान पाकर भस्मासुर ने मन बना लिया कि वह शिव के सिर पर ही हाथ रखेगा। अपने ही वरदान की वजह से परेशान शिव भागे-भागे फिर रहे थे। उन्हें बचाने के लिये विष्णु ने मोहिनी का रूप धरा और भस्मासुर को मोह कर उसे अपने ही सिर पर हाथ रखने और भस्म हो जाने पर विवश कर दिया।

जब यह कांड खत्म हुआ और छिपे हुए शिव को यह खबर मिली तो उन्होंने तय किया कि वे विष्णु को मोहिनी रूप में देखेंगे। उन्होंने विष्णु से आग्रह किया, काफी दबाव डालने पर विष्णु मान भी गए। मगर जैसे ही विष्णु मोहिनी रूप में आये, शिव आसक्त हो गए। उनका खुद पर नियंत्रण नहीं रहा। आगे की कथा अलग-अलग संदर्भों में अलग-अलग तरीके से है, मगर यह हर जगह जिक्र है कि इस संयोग से हरिहरपुत्र का जन्म हुआ।

ये भी पढ़ें -  लाहौल: स्पीति घाटी का छोटा भाई, उतना ही सुंदर और मनमोहक

ये हरिहरपुत्र दक्षिण में अय्यप्पन कहलाए। उनकी वीरता की अलग कथाएं भी हैं। उन्हें समुद्री डाकुओं से नाविकों की रक्षा करने वाला देव भी माना जाता है। बौद्ध धर्म मानता है कि सबरीमला में रहने वाले 12वीं सदी के सिद्ध परमबुद्ध ही दरअसल अय्यप्पन हैं। केरल के मुसलमान भी अय्यप्पन के उपासक हैं। अय्यप्पन जो भी हों मगर भारतीय माइथोलॉजी उन्हें शिव और विष्णु के संयोग से उत्पन्न देव ही मानती है।

दिलचस्प है कि भारतीय मिथक कथाओं में शिव की एक ऐसी पुत्री मनसा का भी जिक्र है जो शिव के एक नाग कन्या के संयोग से पैदा हुई है। जब शिव अमृत मंथन के बाद विष पी लेते हैं तो यही उनकी पुत्री मनसा उनकी रक्षा करती है।


ये रोचक बातें हमें लिख भेजी हैं पुष्यमित्र ने। पुष्यमित्र वरिष्ठ पत्रकार हैं। फैंसी, ग्लॉसी टाइप की मीडियागिरी से परे पुष्यमित्र जमीनी मुद्दों को बारहा उठाते रहते हैं, तफ्सील से लोगों को बताते रहते हैं। इनकी किताबें ‘नील का दाग मिटा: चम्पारण 1917’ और ‘रेडियो कोसी’ भी खासी चर्चित हैं। इन सब के अलावा पुष्य प्रेम, कविता, उत्सव के बारे में भी खूब बतियाते हैं।

Leave a Comment