चलत मुसाफ़िर का Responsible Travel Campaign: “स्मृति वृक्ष’ Smriti Vriksh

हमारे किसी अपने का गुजर जाना बहुत हमें बहुत भावुक करता है, उनकी आखिरी निशानियों के सहारे हम उन्हें याद करते हैं।उनकी याद को हमेशा के लिए जिंदा रखने के लिए चलत मुसाफ़िर ने एक नई पहल का आगाज किया है। उस पहल का नाम है ‘Smriti Vriksh’। इस मुहिम के तहत आप अपने प्रियजन की याद को संजोने के साथ साथ पर्यावरण को भी योगदान दे सकते हैं।

Smriti Vriksh
Smriti Vriksh

क्या है Smriti Vriksh?

चलत मुसाफ़िर द्वारा की गई इस पहल के दो मक्सद हैं। पहला मकसद किसी गुजरे हुए प्रियजन की याद को सहेज कर रखना। दूसरा मकसद पर्यावरण में अपना योगदान देना। Smriti Vriksh के अंतर्गत आप किसी अपने की याद में एक पौधा रोपण कर सकते हैं। जिसे स्वयं चलत मुसाफ़िर ताउम्र सींचता रहेगा।

कब और कहां हुई Smriti Vriksh की शुरुआत?

चलत मुसाफ़िर ने Smriti Vriksh की शुरुआत ऋषिकेश स्थित बस्तापैक नामक एक कैंपसाइट से की। अपनी इस मुहिम का सबसे पहला वृक्षारोपण हमने यहीं पर किया। इस मुहिम की शुभ शुरुआत 5 फरवरी 2022 बसंत पंचमी के दिन की गई।

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किसके द्वारा हुआ Smriti Vriksh का उद्घाटन?

Smriti Vriksh में अनिल जोशी जी योगदान देते हुए
Smriti Vriksh में अनिल जोशी जी योगदान देते हुए

Smriti Vriksh का उद्घाटन पद्म भूषण डॉ. अनिल जोशी जी के द्वारा किया गया। अनिल जोशी जी HESCO (Himalayan Environmemtal Studies and Conservation Organization) के संस्थापक हैं। अनिल जोशी जी नदियों को बचाये जाने वाले आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर लेकर गए। गांव में इस्तमाल होने वाले ‘घराट’ (water mills) को वो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लेकर गए। इसी तरह के कई सारे प्रयास अनिल जोशी जी ने पर्यावरण को संतुलित करने के लिए किये हैं। अनिल जोशी जी ने स्मृति वृक्ष में अपना योगदान ‘प्रकृति’ के नाम का वृक्ष लगा कर दिया। उनका कहना है कि, “पहाड़ों पर टूरिज्म पर बिजनेस तो बहुत लोग करते हैं पर हमें एक रिसपॉन्सिबल टूरिज्म इकोसिस्टम बनाने की जरूरत है। हमें प्रकृति की ओर लौटना चाहिए, जो ज्यादातर लोग करना भूल जाते हैं। चलत मुसाफ़िर की टीम इसे बखूबी आगे बढ़ा रही है। इसके लिए मै टीम की तारीफ करना चाहूंगा कि जो यहां उत्तराखंड के लोग नहीं कर पा रहे हैं, वो काम ये टीम कर रही है”।

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हमारी इस पहल में हमारे साथ पद्म श्री डॉ. योगी एरेन जी भी शामिल थे। योगी एरेन जी ने भी Smriti Vriksh में अपना योगदान दिया। उन्होंने अपनी दिवंगत बेटी ‘तनु’ के नाम का पेड़ लगाया। उन्होंने भी इस वृक्षारोपण के जरिये अपनी बेटी को याद किया था।

कैसे करें Smriti Vriksh में अपना योगदान?

अगर आप भी अपने किसी प्रियजन की याद में पौधरोपण करना चाहते हैं। पर्यावरण में अपना योगदान देना चाहते हैं तो आप चलत मुसाफ़िर की टीम से संपर्क कर सकते हैं। संपर्क करने के लिए आप चलत मुसाफ़िर के फेसबुक और इंस्टाग्राम पेज पर मैसेज कर सकते हैं। इसके अलावा आप दिए गए नंबर पर भी कॉल कर सकते हैं।
+91 63551 22100


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