कम समय में इतना बढ़िया तरीके से अमृतसर कैसे घूमा जाए

अमृतसर। पंजाब राज्य का सबसे ज्यादा चर्चित, प्रसिद्ध और तमाम ऐतिहासिक, सांस्कृतिक सरगर्मियों का केंद्र बिंदु। अमृतसर में हरदिल अजीज स्वर्ण मंदिर है, 1919 के जालियांबाग की स्याह परतें हैं, उस काले साल की याद दिलाता एक बॉर्डर है जब एक देश के दो टुकड़े कर दिए। मलाई मारकर लस्सी भी है, मस्त मसाला कुल्चे भी हैं और इलायची की महक से सराबोर फालूदा भी। एक बहुत ही सुंदर सी हेरिटेज टाइप मार्केट है जहां पर पंजाबी संस्कृति से जुड़े तमाम खूबसूरत सामान खरीदे जा सकते हैं। एक काम करते हैं, आपको थोड़ा डीटेल में बता ही देते हैं कि अमृतसर जाओ तो क्या-क्या घूमना, खाना-पीना, इत्यादि इत्यादि चीजें हैं वहां।

स्वर्ण मंदिर में आधी रात को जाना:

वैसे ये बात तो सबको पता ही होगी कि ये कोई मंदिर नहीं, गुरुद्वारा है। सिक्खों के पांचवें गुरू अर्जुन देव ने इस गुरुद्वारे को बनवाया था। सोने से मढ़ा इसका मुख्य भवन एक बड़े से जलकुंड के बीचोबीच बना है। गुरुद्वारे का विशाल परिसर हर रोज सैकड़ों लोगों को छांव देता है, यहां चलने वाला लंगर हजारों की भूख हर रोज मिटाता है। दिन में तो श्रद्धालुओं की भयंकर भीड़ रहती है। मत्था टेकने को अनगिनत माथे हर रोज आते रहते हैं।

दिन की भव्यता जितनी निराली है, उतनी ही सुकून देने वाली है स्वर्ण मंदिर में बिताई गई रात। स्याह आसमान से सटकर चमकते हुए परिसर के द्वार और गुंबद। पानी पर टिमटिमाती परछाईं में चमचम करता गुरुद्वारा। कुंड की शीतलता और माहौल में बसी शांति एक अलग ही अनुभव देती है। मुझे तो बड़ा आनंद आया था। मेरा फोन होटल के कमरे में चार्जिंग पर न लगा होता, तो जरूर वहीं चद्दर तानकर सो जाती।

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जालियां वाले बाग की दीवारों पर जमे गोलियों के निशान को एकटक निहारना

13 अप्रैल आज भी एक काला दिन है, साल 1919 को इसी दिन मानवता अपने नाम पर रोई थी। जब हजारों की संख्या में इकट्ठे मर्द, औरत, बुजुर्ग, बच्चे धड़धड़ाती संगीनों तले मौत के गड्ढों में गिरा दिए गए। जालियां वाला बाग को काफी पार्क टाइप का रूप दे दिया गया है, जो मुझे थोड़ा अजीब सा और आर्टिफिशियल लगा। ऐसा लग रहा था मानो इस जगह को टूरिस्ट प्लेस सा बना दिया गया हो, पार्क की संरचना कहीं न कहीं घटनास्थल की गंभीरता को कम कर रही थी।

बहरहाल, टॉपेरी अंदाज में पौधों को ब्रिटिश सैनिकों के आकार में इस कदर बड़ा किया गया है कि वो एक तरह से घटना का रूपांतरण लगें, जो कि एक क्रिएटिव कदम है। परिसर में वो कुआं भी मौजूद है, जिसमें गोलियों की बौछार से बचकर भागते लोगों ने कूदकर अपनी जान दे दी। वो कुआं, आज भी वो सारी चीखें, वंदेमातरम के नारे, आजाद दिल हिंदुस्तानियों की कराहती आवाजें इस कुएं में सुनने को मिल जाएंगी, अगर आप महसूस कर सकें तो। दीवार पर सफेद रंग से मार्क किए गए गोलियों के गहरे निशान दिल में बहुत अंदर तक उतर जाते हैं। वो सारे विवरण, आजादी की लड़ाई की कहानियां सब जीवंत हो जाती हैं।

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वाघा-अटारी बॉर्डर

यहां जाना तो तकरीबन हर एक का सपना होता है। एक अलग ही रोमांच होता है देश की सीमा पर पहुंच जाना। और फिर पंद्रह अगस्त, छब्बीस जनवरी के वक्त बॉर्डर से आने वाली जोशीली तस्वीरें इस जगह के बारे में उत्साह बढ़ा देती हैं। मतलब सोचो, एक दीवार और कटीले तार के इधर एक देश और उधर दूजा देश। एक साथ कितने सारे भाव उमड़ आते हैं ये विचार आते ही।

जब मैं वाघा बॉर्डर पहुंची तो सबसे मजेदार चीज पता है क्या लगी, भारत की सीमा का जो द्वार है, वहां से समांतर स्थिति में खड़े होकर देखो तो पाकितस्तान का झंडा और भारत का नाम एक ही पंक्ति में आ खड़े होते हैं। यहां पर शाम को होने वाली बीटिंग द रिट्रीट के अपने ही जलवे हैं। हां, अगर आपको राष्ट्रीय त्योहारों पर बॉर्डर जाना है, तो पहले से रजिस्ट्रेशन करा लें, ये ऑनलाइन भी होता है। क्योंकि इन दिनों यहां भयंकर से भी ज्यादा भीड़ होती है

लस्सी और फालूदे के मजे

बहुत ही कम दाम में एकदम गाढ़ी और खालिस लस्सी के मजे लीजिए। फिर थोड़ा चहलकदमी करके क्रीमी और जबर स्वादिष्ट फालूदा का रसास्वादन करिए। कदम पर यहां लस्सी और फालूदा की दूकानें मिल जाएंगी। और भी कई सारे खाने के स्टॉल मिल जाएंगे। भूटूरे-छोले, जलेबियां, ऐसे ही कई सारे पारंपरिक पकवान। सालों से खड़ी हुई दूकानें भी हैं कई। जिनके स्वाद को आपकी जिह्वा बरसों बरस नहीं भुला पाएगी।

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स्वर्ण मंदिर के पास वाली मार्केट एक्सप्लोर करना

इस मार्केट को हालिया सालों में किसी हेरिटेज शहर जैसा लुक दे दिया गया है। पीले-सुनहले पत्थरों से तराशकर बनाए गए लंबे-चौड़े परकोटे, महीन नक्काशियों से बने लाइट स्टैंड गजब का ही माहौल बना देते हैं। यहां फुलकारी वाले दुपट्टे भी हैं, पंजाबी जूतियां भी, भगत सिंह के विचारों से सजे मर्चेंडाइज भी। दमकती-चमकती ये मार्केट किसी आम खरीददारी की जगह से काफी अलहदा है। मैंने तो ये प्यारी सी जूतियां खरीदीं।

साथ ही आप यहां पर बने कई सारे मंदिर भी जा सकते हैं, जिनका अपना-अपना धार्मिक महत्व है। विभाजन पर और सिख राजाओं पर बने कुछ संग्रहालय हैं। स्वर्ण मंदिर के अलावा भी कई आइकॉनिक गुरुद्वारे हैं, वहां भी घूमकर आ सकते हैं। कुल मिलाकर ये मेरा एक रात और दो दिन का सफर था। आपको भी सप्ताहांत पर या कम समय में घूमना हो तो ये चटपट बातें आपके काम आ सकती हैं।


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