पटना: गंगा किनारे बसा एक ‘सदाबहार’ प्राचीन शहर

पाटलिपुत्र यानी आधुनिक समय का पटना आज बिहार की व्यस्त राजधानी है। कहा जाता है कि पटना नाम संस्कृत के ‘पत्तन’ शब्द से आया है जिसका मतलब है बंदरगाह। यह शहर गंगा नदी के दक्षिणी तट पर बसा हुआ है। ऐसा समझा जाता है कि पटना नाम शेरशाह सूरी के समय से प्रचलित हुआ है।

यह शहर चंद्रगुप्त मौर्य, सम्राट अशोक, आचार्य चाणक्य, गुरु गोविंद सिंह और ऐसे ही असंख्य महापुरुषों की धरती है। अगर आप पहली बार पटना आ रहे हैं तो यहां कई ऐसी जगहें हैं जो आपको पटना के इतिहास से रूबरू कराती है और पटना शहर को और अच्छे से समझने में मदद करती है।

पटना संग्रहालय

पटना अतीत की कहानियों से भरा हुआ एक शहर है। जादूगर के नाम से मशहूर पटना संग्रहालय 1917 में स्थापित हुआ। इस म्यूजियम को बनाने का प्रस्ताव ‘डॉ सच्चिदानंद सिंह’ द्वारा दिया गया था।

पटना संग्रहालय में बेशकीमती वस्तुओं का संग्रह है। इस संग्रहालय में गौतम बुद्ध के अवशेष, मूर्तियां, दुर्लभ सिक्के, पांडुलिपि और शीशे की कलाकृतियां मौजूद है।

इस संग्रहालय में 200 करोड़ साल पुराना पेड़ भी है जो अब पत्थर में परिवर्तित हो चुका है। यह संग्रहालय मुगल-राजपूत वास्तुशैली में निर्मित है, जिसे अभी तक संभाल के रखा गया है।

पटन देवी मंदिर

पटना के गुलजारबाग इलाके में स्थित पटन देवी मंदिर, शक्ति उपासना के प्रमुख केंद्रों में से एक है। लोकमान्यता है कि भगवान शिव के तांडव के दौरान माता सती के शरीर के 51 खंड हुए। ये अंग जहां-जहां गिरे वहां शक्तिपीठ की स्थापना हुई। ऐसा माना जाता है कि माता सती की दाहिनी जांघ यहीं पर गिरी थी।

पटन देवी मंदिर परिसर में काले पत्थर की बनी महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की प्रतिमा स्थापित है। मंदिर परिसर में ही योनि कुंड है, जिसके विषय में कहा जाता है कि इसमें डाली जाने वाली हवन सामग्री भूगर्भ में चली जाती है।

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वैसे तो मंदिर में हर दिन भीड़ रहती है परंतु नवरात्रि के प्रारंभ होते ही इस मंदिर में भक्तों का तांता लग जाता है।

गांधी संग्रहालय

गांधी संग्रहालय पटना के गांधी मैदान के उत्तर पश्चिम कोने में स्थित है। यह देश के 11 गांधी संग्रहालय में से एक है। इसकी स्थापना 9 नवंबर 1967 को हुई थी। महात्मा गांधी की हत्या के बाद, उसके दर्द से उबरने के लिए तत्कालीन राष्ट्रीय नेताओं ने उनकी यादों को संजोने के लिए एक गांधी स्मारक निधि का गठन किया। गांधी जी को महात्मा बनाने वाले बिहार की विशेषता को समझते हुए 9 दिसंबर 1955 को समिति ने बिहार में गांधी संग्रहालय बनाने का निर्णय लिया। संग्रहालय में आते ही बाईं और गांधी टैगोर कक्ष है। 1940 में गांधीजी और टैगोर की शांति निकेतन में आखिरी मुलाकात हुई थी। यह प्रतिमा उसी भेंट को दर्शाती है। दो भवन को जोड़ने वाली दीवार पर गांधीजी के जीवन की कहानी का चित्रण भित्ति चित्र द्वारा किया गया है।

अगम कुआं

अगम कुआं, पटना के पंच पहाड़ी के रास्ते पर गुलजारबाग रेलवे स्टेशन के समीप स्थित है। अगम का मतलब होता है पाताल से जुड़ा हुआ और यह कुआं 105 फीट गहरी है। ऐसा माना जाता है कि सम्राट अशोक ने इसे बनवाया था। सम्राट अशोक ने राजा बनने के लिए अपने 99 भाइयों की हत्या कर उनकी लाशें इस कुएं में डलवाई थी। इस कुएं की खासियत यह है कि भयंकर सूखा में भी यह सूखता नहीं और बाढ़ में इसके जल स्तर में कोई खास वृद्धि नहीं आती। ऐसा कहा जाता है कि अगम कुआं के जल का इस्तेमाल करने से कई बीमारियां दूर हो जाती है।

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शीतला मंदिर

अगम कुआं के बिल्कुल पास हीं, शीतला माता का मंदिर स्थित है। ऐसी मान्यता है कि पहले कुएं की पूजा की जाती है और फिर शीतला माता की।

इस मंदिर के अंदर 7 देवी के पिंड हैं जिसकी पूजा चेचक, कुष्ठ रोग आदि को दूर करने के लिए किया जाता है।

गोलघर

गोलघर के नाम का शाब्दिक अर्थ है गोलाकार आकृति वाला घर। यह गोलघर पटना में गांधी मैदान के पश्चिम में स्थित है। यह एक अद्भुत नमूना है जिसके निर्माण में कहीं भी स्तंभ नहीं है। ब्रिटिश इंजीनियर कैप्टन जॉन गार्स्टिन ने अनाज के भंडारण के लिए इसका निर्माण 20 जनवरी 1784 को शुरू करवाया था। इसका निर्माण कार्य 20 जुलाई 1786 को ब्रिटिश राज में संपन्न हुआ था।

गोलघर पटना की स्थापत्य कला का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। इसका आकार 125 मीटर और ऊंचाई 29 मीटर है। 1979 में गोलघर को राज्य संरक्षित स्मारक घोषित किया गया हैं। यहां पर लेजर लाइट शो भी होता है। गोलघर के ऊपरी सिरे से गंगा नदी का शानदार अवलोकन किया जा सकता है।

कारगिल चौक

कारगिल चौक एक युद्ध स्मारक है जिसकी स्थापना वर्ष 2000 में की गई थी। यह गांधी मैदान के पूर्वोत्तर कोने में स्थित है। यह बिहार और झारखंड के उन सैनिकों को समर्पित है जिन्होंने 1999 के कारगिल युद्ध में अपने प्राणों का बलिदान दिया था।

कारगिल चौक पटना का आकर्षण केंद्र है क्योंकि आम जनता को श्रद्धांजलि देने, विरोध करने और न्याय की मांग के लिए यहां कैंडल मार्च निकाले जाते हैं।

बुद्ध स्मृति पार्क

बुद्ध स्मृति पार्क 22 एकड़ जमीन पर, 125 करोड़ की लागत से बना है। यह पटना के रेलवे स्टेशन के पास स्थित है। इसका उद्घाटन 27 मई 2010 को बुद्ध पूर्णिमा के दिन तिब्बतियों के धर्मगुरु दलाई लामा द्वारा हुआ। इस पार्क के बीच में बनी 200 फीट ऊंची पाटलिपुत्र करुणा स्तूप सबसे प्रमुख संरचना है। इसमें 6 देशों से लाए गए ‘बुद्ध अस्थि अवशेष’ की मंजूषाएं रखी गई है।

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बुद्धा स्मृति पार्क के परिसर में मेडिटेशन सेंटर, पार्क ऑफ मेमोरी, म्यूजियम, आनंद बोधि वृक्ष, लाइब्रेरी, स्मृति बाग और भगवान बुद्ध की प्रतिमा बनी हुई है।

गांधी घाट

पटना में गंगा नदी पर कई घाट हैं, जिसमें गांधी घाट सबसे लोकप्रिय है। यह घाट एनआईटी पटना के पीछे स्थित है। इस घाट का नाम महान नेता और स्वतंत्रता सेनानी महात्मा गांधी के नाम पर रखा गया है। ऐसा माना जाता है कि यहां गांधी जी की अस्थियां विसर्जित की गई थी। प्रत्येक शनिवार और रविवार को शाम में इस घाट पर गंगा जी की आरती होती है।

केसरी रंग के वस्त्र पहने पुजारी बड़ी श्रद्धा भाव से आरती करते हैं। शाम का समय और आरती की गूंज, दृश्य को और भी मनमोहक बना देती है।


पटना शहर के बारे में लिखा है हमारे साथ इंटर्नशिप कर रहीं शिवांजलि छाया ने।  शिवांजलि पत्रकारिता की छात्रा हैं। अपने बारे में वो बताती हैं, मुझे कोई भी काम एक जगह बैठकर करना पसंद नहीं है, इसलिए मेरी जिंदगी का एक ही मकसद है ‘घूमना।’ मेरे लिए घूमना एक शौक ही नहीं, बल्कि लोगों को जानने का, उनके जीवन शैली को समझने का, दुनिया के विभिन्न स्थानों, भोजनों, संस्कृतियों, परंपराओं से अवगत होने का एक जरिया है। मैं वह हूं जो अभी सीख रही हूं और अपने ज्ञान और अनुभव से दुनिया की खूबसूरती को औरों तक पहुंचाना चाहती हूं।


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