Panch Kedar: पांडवो का पश्चाताप

महाभारत जैसे महाकाव्य से तो हर कोई परिचित है। कौरवों और पांडवों के बीच इस युद्ध में हालांकि जीत तो पांडवों की हुई थी लेकिन इस बीच उनसे कुछ पाप भी हुए थे। उन्हीं पापों के पश्चाताप की देन है ये ‘Panch Kedar’। चलिए जानते हैं ‘Panch Kedar’ की क्या कथा है ?

Panch Kedar
Panch Kedar

पांडवों से किस तरह का पाप हुआ था ?

महाभारत युद्ध के दौरान बहुत हत्याएं हुई। न्याय और अन्याय भी हुए, इन्हीं में से एक था पांडवों का पाप। पहला पाप था गोत्र हत्या, यानी अपने ही कुल के सदस्यों की हत्या का, दूसरा पाप था गुरु हत्या, तीसरा पाप था ब्राह्मण हत्या। श्री कृष्ण ने पांडवों से कहा इस पाप से यदि कोई मुक्ति दिला सकता है तो वो शिव हैं। ये सुनकर तुरंत ही पांडव भगवान शिव की खोज में निकल पड़े।

कैसे और कहां मिले शिव ?

अपने पापों का पश्चाताप करने पांडव द्रौपदी संग, ‘केदार घाटी’ की ओर शिव की तलाश मे निकल पड़े। लेकिन शिव पांडवों से इतने नाराज थे कि वो उनसे मिलना नहीं चाहते थे। पांडवों के ‘केदार घाटी’ में होने की खबर शिव को मिलते ही उन्होंने अपना भेस बदल लिया।

ये भी पढ़ें:  सीतामढ़ी: सीता माता के जन्म और रावण के विनाश से जुड़ा स्थल

शिव भैंस का रूप धारण कर अन्य भैंसो के साथ शामिल हो गए। पांडवों के बहुत ढूंढने पर भी जब शिव उन्हें नहीं मिले तो भीम ने अपना विशाल रूप धारण कर लिया। विशाल रूप धारण करके उन्होंने दो पर्वतों पर अपने पैर जमा दिये। ऐसा रूप देख कर सारी भैंसे डर कर उनके पैरों के नीचे से निकलने लगी। लेकिन शिव जो भैंस के रूप में थे, भीम के पैरों के नीचे से कभी नहीं निकलते। इस बात को भीम बखूबी समझ गए और शिव को पहचान लिया। पहचानते ही उन्होंने भैंस को पूंछ की तरफ से पकड़ने की कोशिश की। शिव खुद को जमीन के अंदर ढकेल रहे थे। इसी खींचातानी में भैंस के कई टुकड़े हो गए और शरीर के हिस्से अलग-अलग जगहों पर जा गिरे।

शरीर का आगे वाला भाग जो जमीन में धसा हुआ था, अब ‘पशुपतिनाथ‘ के रूप में पूजा जाता है। बाकी शरीर के पांच टुकड़े जिन जगहों पर जा गिरे, उन्हीं स्थानों को ‘पंच केदार’ के रूप में पूजा जाता है।

ये भी पढ़ें:  Patal Bhuvaneshwar: जहां होते हैं चारों धाम के एक साथ दर्शन

कहां-कहां गिरे थे शिव के टुकड़े?

शिव के पांच टुकड़े पांच अलग-अलग जगह पर गिरे थे। पहला टुकड़ा पीठ का ‘केदार घाटी’ मे गिरा। दूसरा टुकड़ा नाभि का ‘मध्यमहेश्वर’ मे गिरा। तीसरा टुकड़ा भुजाओं का ‘तुंगनाथ’ में गिरा। चौथा टुकड़ा नेत्रों का ‘रुद्रनाथ’ में गिरा। वहीं पांचवा टुकड़ा जटाओं का ‘कल्पेश्वर’ में गिरा। इन्हीं सब स्थानों में पांडवों द्वारा मंदिर स्थापित किये गए जिन्हें हम ‘पंच केदार’ के नाम से जानते हैं। इन मंदिरों की स्थापना के बाद शिवजी पांडवों से बेहद खुश हुए और उन्हें माफ कर दिया।

‘पंच केदार’ के दर्शन कब कहाँ और कैसे किए जाएं ? ये जानने के लिए आप हमारी इस सीरीज से जुड़े रहें।


ये भी देखें: https://www.chalatmusafir.com/bhootnath-temple/

Leave a Comment