Narsingh Temple: जहां स्थापित है विष्णु जी का चौथा अवतार

Narsingh Temple | देवभूमि उत्तराखंड के चमोली जिले के जोशीमठ में स्थित है Narsingh Temple। देवभूमि में स्थित हर मंदिर की तरह इस मंदिर की भी अपनी अलग मन्यता है। इस मंदिर में भगवान विष्णु अपने चौथे अवतार यानी नरसिंह अवतार में विराजमान हैं। सर्दियों मे बद्रीनाथ की पूजा इसी मंदिर में की जाती है। क्या है इस मंदिर की कहानी, जानने के लिए इस अर्टिकल को आखिरी तक पढ़े।

Narsingh Temple
Narsingh Temple

क्या है Narsingh Temple की कथा?

हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रहलाद विष्णु भगवान का बहुत बड़ा भक्त था। लेकिन प्रहलाद की इस भक्ति से हिरणकश्यप अत्यंत क्रोधित रहता था। इसी वजह से उसने अपने बेटे की हत्या करने भी कोशिश की। कभी उसे नदी में फेक दिया तो कभी उसे अपनी बहन होलिका के साथ जलती आग में बैठाया। लेकिन हिरणकश्यप प्रहलाद का बाल भी बांका नही कर पाया। जब हिरणकश्यप ने प्रहलाद को स्वयं अपने हाथो से मारने की कोशिश तो भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लिया। नरसिंह के अवतार में भगवान विष्णु ने हिरणकश्यप का वद्ध कर के अपने भक्त प्रहलाद की रक्षा की।

ये भी पढ़ें:  Patal Bhuvaneshwar: जहां होते हैं चारों धाम के एक साथ दर्शन

कैसे हुई Narsingh Temple की स्थापना?

Narsingh Temple की स्थापना को लेकर अलग अलग कहानियां हैं। एक कथा के अनुसार पांडवों ने स्वर्गरोहिणी की यात्रा के दौरान इस मंदिर की स्थापना की थी। एक कथा के अनुसार आदिगुरु शंकराचार्य ने मंदिर का निर्माण करवाया था। कुछ का ये मानना भी ही कि यहां मूर्ति अपने आप ही स्थापित हुई थी।

क्या है Narsingh Temple की मान्यता?

Narsingh Temple में विराजित भगवान विष्णु की मूर्ति मात्र 10 इंच की है। उनके बाएं हाथ की कलाई हर दिन घिस घिस कर पतली हुई जा रही है। कहते हैं कि जिस दिन ये कलाई पूरी तरह घिस कर टूट जाएगी तो बद्रीनाथ जाने का रास्ता बंद हो जाएगा। बद्रीनाथ मार्ग पर दो पर्वत हैं नर- नारायण जिन्हें जय और विजय पर्वत के नाम से भी जाना जाता है। माना जाता है नरसिंह की कलाई अलग होते ही ये दोनों पर्वत ढह जाएंगे। भारी आपदा और भूस्खलन के कारण बद्रीनाथ जाने का रास्ता बंद हो जाएगा। इसके बाद भगवान बद्रीनाथ के दर्शन चमोली के तपोवन में स्थित भविष्य बद्री में होंगे।

ये भी पढ़ें:  भारत का सबसे ऊंचा शिवालय, तृतीय केदार: Tungnath Temple

कैसे पहुंचे Narsingh Temple?

बस या ट्रेन के जरिये आप ऋषिकेश पहुंच सकते हैं या फिर हवाई सेवा से जॉलीग्रांट भी आ सकते है, फिर यहां से टैक्सी से ऋषिकेश पहुंच सकते हैं। ऋषिकेश से बस या टैक्सी से आप जोशीमठ पहुंच सकते हैं। जोशीमठ से लोकल वाहन आपको Narsingh Temple पहुंचा देगा।


ये भी देखें:

Leave a Comment