महाबलेश्वर घूमने का प्लान बनाने से पहले पढ़ें ये जरूरी बातें

महाराष्ट्र के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक महाबलेश्वर को रब ने जरूर फुर्सत से बनाया होगा। इस जगह पर नदियोंझरनोंझीलोंपहाड़ों का सुंदर समावेश है। यही कारण है कि महाबलेश्वर को महाराष्ट्र के हिल स्टेशनों की रानी कहा जाता है। यहां कई ऐसे पॉइंट्स हैंजहां से दूरदूर तक सिर्फ और सिर्फ पहाड़ ही नजर आते हैं। महाबलेश्‍वर का अर्थ होता है, गॉड ऑफ ग्रेट पॉवर यानि भगवान की महान शक्ति। यहां शिव के कई बड़े मंदिर है, इसके अलावा महाबलेश्वर को पांच नदियों की भूमि भी कहा जाता है क्योंकि यहां वीना, गायत्री, सावित्री, कोयना और कृष्‍णा नदियां एक साथ बहती हैं।

ऐसे हुई खोज

महाबलेश्वर की खोज सबसे पहले राजा सिंघन ने की थी। यहां का प्रसिद्ध महाबलेश्‍वर मंदिर, जो अपनी सुंदर नक्काशी के लिए जाना जाता है, राजा सिंघन ने ही बनवाया था। हालांकि बाद में शिवाजी ने इस राज्य पर कब्जा जमा लिया था। शिवाजी ने यहां का मशहूर प्रतापगढ़ किला बनवाया। उनके बाद 1819 में अंग्रेजों ने महाबलेश्वर को अपने हाथों में ले लिया। ये जगह ब्रिटिश समय में बॉम्बे प्रेसिडेंसी की ग्रीष्मकालीन राजधानी हुआ करती थी। अंग्रेजों ने इसे 1828 में पर्वतीय स्थल के रूप में स्थापित किया था, पहले इसका नाम मैलकमपेथ था, जो ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी के गवर्नर के नाम पर रखा गया था। आजादी के बाद महाबलेश्वर, एक हिल स्‍टेशन के रूप में उभरा जहां सैलानी छुट्टियां बिताना बेहद पसंद करते हैं।

जाने से पहले जानें ये जरूरी बातें

महाबलेश्वर मुंबई से 247, पुणे से 120, औरंगाबाद से 348, पणजी से 430 किलोमीटर दूर है। यदि आप मुंबई में हैं और महाबलेश्वर जाना चाहते हैं, तो दादर से कई सारी बसेंवॉल्वो और टैक्सी जाती हैं। आप अपने बजट के हिसाब से वहां पहुंच सकते हैं। महाबलेश्वर पहाड़ी इलाका हैइसलिए जरूरी है कि ड्राइवर अनुभवी होजो पहाड़ों के घुमाव को समझता हो। यहां के दार्शनिक स्थलों को देखने का असली मजा अपने वाहन से ही है। 

ठहरने के लिए यहां पर सस्ते टेंट्स की भी व्यवस्था होती है। इसके अलावा बजट अनुसार आप होटल ले सकते हैं। महाबलेश्वर की स्ट्रॉबेरी और उससे बनी चीजें काफी मशहूर है। इसके अलावा यहां की चने और चिक्की खाने का अपना ही मजा है। यहां आपको लगभग 10 तरह की चिक्की और भुने चने खाने को मिलेंगे। यहां की कोल्हापुरी चप्पलें काफी फेमस हैं। यहां की महिलाएं अपने हाथों से ही इन चप्पलों की तैयार करती हैं।

चीजे ऐसी जिसे देख कर मुंह में पीनी आ जाए

घूमने वाली जगहें

ऊंची चोटियांभय पैदा करने वाले घाटियांचटक हरियालीठण्‍डी हवामहाबलेश्‍वर को और जगहों से अलग बनाती हैं। यहां पर मैं कुछ जगहों के बारे में बता रही हूं जो घूमने के लिहाज से मस्त हैं। महाबलेश्वर में लिंगमाला वॉटर फॉल, वेन्ना लेक, पुराना महाबलेश्वर मंदिर भी है। महाबलेश्वर मंदिर की नक्काशी देखने लायक है। यहीं से कुछ दूरी पर वेन्ना लेक है। जहां रंग बिरंगी नाव आपको पूरी झील की सैर करवाती है। यहां घुड़सवारी करने की भी सुविधा है। महाबलेश्वर में भगवान श्रीकृष्ण का एक मंदिर है जो स्थानीय लोगों के बीच ‘पंचगंगा’ के नाम से मशहूर है जिसका अर्थ है ‘पांच नदियां’। 

पंचगंगा मंदिर

प्रतापगढ़

महाबलेश्वर से लगभग चौबीस किलोमीटर दूर है। प्रतापगढ़ का किला मराठा सम्राट शिवाजी की निशानी है। इस किले को शिवाजी ने खुद अपने निवास स्थान के तौर पर बनवाया था। इसी किले में  शिवाजी ने ताकतवर योद्धा अफजल खान को नाटकीय तरीके से मार गिराया था। यह किला छत्रपति शिवाजी के पसंदीदा किलों में से एक था।

व्यू प्वाइंट्स

पहाड़ों की अप्रतिम छटा को निहारते रहने के लिए महाबलेश्वर में लगभग तीस से ज्यादा खूबसूरत व्यू पवॉइंट्स हैंजिनमें एलफिस्टनमाजोरीनाथकोटबॉम्बे पार्लरसावित्री प्वाइंटआर्थर प्वाइंटविल्स प्वाइंट,हेलन प्वाइंटलाकविंग प्वाइंटकर्निक प्वाइंट और फाकलेंट प्वाइंट बेहद मशहूर हैं। इन पॉइंट्स पर बेहद सतर्कर्ता बरतनी चाहिए। ये काफी खतरनाक हैं लेकिन रोमांच से भरे हैं। हर एक पॉइंट के पास खाने-पीने की तमाम चीजें मौजूद रहती हैं। 

आर्थर पॉइंट

इस प्वाइंट से कोई भी हल्की चीज फेंकने से वह हवा के बहाव से दोबारा ऊपर आ जाती है। इस जगह को क्वीन ऑफ ऑल प्वाइंट्स भी कहा जाता है। इस प्वॉइंट के नाम के पीछे भी एक कहानी है, एक ब्रिटिश अफसर ऑर्थर मैलेट यहां बैठकर सावित्री नदी में डूबी अपनी बीवी और एक महीने की बच्ची को याद किया करते थे। इस प्वाइंट से सावित्री नदी आसानी से दिखती है। 

एलफिंस्टन प्वाइंट

एलफिंस्टन प्वाइंट की खोज 1830 को हुई थी। इसका नाम माउंट स्टुअर्ट एलफिंस्टन के नाम पर पड़ा थाजो उस दौरान बॉम्बे प्रेसीडेंसी के गवर्नर हुआ करते थे। यहां से प्रतापगढ़ किले का पैनोरमिक व्यू देखा जा सकता है। हालांकि दूर से इसका लुक हाथी के सूंड की तरह दिखता है। 

पंचगनी

कृष्णा घाटी के दक्षिण में स्थित पंचगनी महाबलेश्वर से मात्र 19 किलोमीटर दूर है। ये जगह बॉलीवुड के लिए काफी पसंदीदा जगह है। टेबल टॉप बॉलीवुड का फेवरेट शूटिंग प्वाइंट है। ये जगह आमिर खान को इतनी पसंद आई थी कि उन्होंने अपनी शादी भी यहीं करने का फैसला किया। इसके अलावा उन्होंने यहीं अपना घर भी लिया है। फिल्म ‘तारे जमीन पर’ में जिस स्कूल को दिखाया गया था, वो भी यहीं है।

महाबलेश्वर का मेरा सफर तो खूब मजेदार था। आप सब भी वहां घूमने जाएं, काम की कुछ बातें तो मैंने बता दीं आपको, अब जब आप जाना तो और भी मजेदार चीजें ढूंढकर लाना।

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ये तमाम बातें हमें लिख भेजी हैं शालू अवस्थी ने। शालू पत्रकार हैं, अभी जल्द ही महाराष्ट्र में रहने आई हैं। घूमने की जितनी भी दबी आकांक्षाएं थीं, यहां आकर उनको पंख लग गए हैं। बताती हैं कि अब तो हर वीकेंड निकल लेती हैं कहीं न कहीं घूमने। धुन सवार है कि जितना घूम सकें उतना घूम डालें, बस घूम डालें। स्वादिष्ट व्यंजनों में जान बसती है। फोटो खिंचवाना पसंदीदा शगल है। 


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