चारों धाम की रक्षक मां धारी: Dhaari Devi Temple

देवभूमि उत्तराखंड में देवी देवताओं की अनेक कहानियां आपको सुनने को मिलेंगी। इन्ही कहानियों में से एक प्रचलित कहानी Dhaari Devi Temple की भी है। 2013 में आई भयानक आपदा को भी मां धारी के क्रोध से जोड़ा जाता है। तो चलिए आपको ले चलते हैं Dhaari Devi Temple और बताते है उससे जुड़ी हुई कहानी।

Dhaari Devi Temple
Dhaari Devi Temple

कहां स्थित है Dhaari Devi Temple?

Dhaari Devi Temple श्रीनगर गढ़वाल में अलकनंदा नदी के बीचोबीच स्थापित है। मंदिर की देख रेख धारी गांव के नागरिक ही करते हैं। नदी के बीचोबीच होने की वजह से यह मंदिर बहुत ही सुंदर नजर आता है।

क्या है Dhaari Devi Temple की कथा?

माना जाता है कि धारी देवी सात भाईयों की एकलौती बहन थी। मां- बाप के बचपन में गुजर जाने के बाद उनकी देख-रेख उनके भाई ही करते थे। एक बार किसी ब्राह्मण ने बताया कि धारी देवी के गृह अपने भाईयों के लिए बहुत खराब हैं। तब धारी देवी तेराह साल की हुआ करती थी। उनके भाईयों को ये बात जानकर उनसे नफरत होने लगी। धीरे- धीरे करके उनके पांच भाईयों की मृत्यु हो गई। बचे हुए दो भाई डर चुके थे और उन दोनों ने मिलकर धारी देवी खत्म करने का सोचा। उनके बड़े भाई ने धारी देवी को मारने की कोशिश की और उनका सिर धड़ से अलग कर दिया। उनका धड़ उसी जगह पर रह गया और आज वहां कालीमठ नामक मंदिर स्थापित है।

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सिर छटक कर अलकनंदा में जा गिरा। वो बहते बहते धारी गांव के पास जा पहुंचा। वहां एक आदमी अपने खेत में काम कर रहा था और उसने रोने की भयानक आवाज सुनी और नदी की तरफ देखा। उसने देखा कि एक बच्ची नदी में बह रही है लेकिन अपने डूब जाने के डर से वो हिम्मत नहीं जुटा पाया। अचानक से एक आकाशवाणी हुई, “तू नदी पर जहां- जहां कदम रखेगा वहां सीढियां बनती जाएंगी।” उस आकाशवाणी पर भरोसा करके वो नदी में उतर गया और सीढियां बनती चली गई।

कहते हैं, वो सिढियां कुछ वक्त पहले तक दिखाई देती थी। जैसे ही उस आदमी ने बच्ची को उठाने की कोशिश की तो उसने देखा की वो बच्ची नहीं बल्कि सिर्फ उसका सिर था। वो घबरा गया और सिर उसके हाथ से छूट गया। इतने में एक और आकाशवाणी हुई और उस आदमी को सर को किसी चट्टान पर स्थापित करने को कहा गया। उसने बात मानी और बिल्कुल वही किया। तबसे Dhaari Devi Temple वहीं स्थापित हुआ। कहते हैं कि धारी देवी की मुरत में सुबह बच्ची का, दोपहर में महिला और शाम को बूढ़ी औरत का रूप दिखता है।

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क्या है 2013 की आपदा से Dhaari Devi Temple का जुड़ाव?

कहा जाता है कि पावर प्लांट के कार्य के चलते सरकार ने धारी देवी मंदिर को दूसरी जगह स्थापित करने का निर्णय किया। पंडितों और गांव के नागरिकों ने पहले ही सचेत कर दिया था। उनका कहना था कि अगर मूरत को हाथ भी लगाया तो प्रलय होना निश्चित है। लेकिन विज्ञान ने भक्ति को नहीं सुना और अपना काम चालू रखा। जैसे ही धारी देवी की मूरत को हटाया गया उसके कुछ ही देर में आपदा आगयी। केदारनाथ से ऊपर स्थित चौराबारी झील में बादल फट पड़ा। उसके बाद का हाल तो सारा भारत जानता है। मृतकों की आज भी कोई गिनती नहीं। आपदा से पहले मंदिर समतल में था। लेकिन बाड़ के बाद मंदिर अलकनंदा नदी के बीचोबीच आगया। आस पास का सारा इलाका नदी में समा गया।

आपदा से पहले Dhaari Devi Temple
आपदा से पहले Dhaari Devi Temple

कैसे पहुुंचे Dhaari Devi Temple?

सबसे पहले आपको बस या ट्रेन के जरिये ऋषिकेश पहुंचना होगा। वहां से आपको धारी देवी के लिए बस आसानी से मिल जाएगी।

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