तमिलनाडु का खाना मतलब सादगी, चटख रंग, भरपूर सब्जियां और बेमिसाल स्वाद

तमिलनाडु, भारत के दक्षिण में बसा एक विशाल राज्य। समृद्ध पुरातन साम्राज्यों के अवशेषों, संपन्न प्राकृतिक संपदाओं खूबसूरत पहाड़ियों वाला राज्य। जिसकी राजधानी चेन्नई अपने आप में इतिहास के कई पन्ने समेटे हुए है। इस राज्य की ये तमाम सारी बातें जितनी निराली हैं, उतना ही अनोखा है यहां का खाना।

चेन्नई का अपना ये सफर मैंने तपती गर्मी के बीच में तय किया। समुद्र के रेतीली किनारों पर चलते वक्त ऐसा लग रहा था मानो कोई हीट थैरेपी करा रही हूं अपने पैरों में। थक चुके पैरों के लिए ये कुछ मिनटों के लिए राहत की बात थी, लेकिन जल्द ही लगने लगा कि इतने तापमान पर तो छल्ली भूनी जा सकती है। इतनी गर्मी में भी चेन्नईवासियों की जीवटता देखकर मैं चकित थी। यहां तकरीबन हरएक औरत अपने बालों में बड़े करीने से चोटी कर गजरा लगाए हुई थी। ऐसे समय में जब मैंने बालों को कसकर ऊपर जूड़ा बना रखा था, खुद को सूती गमछे के कई लेयर में छुपा रखा था, इन लोगों का ऐसे मस्ती से चलते रहना मेरे लिए एक अजूबा ही था।

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इतनी गर्मी में सबसे सुकून वाली चीज थी तमिलियन खाना। दही, नारियल, पुदीना, चावल, पके कटहल और गुड़ की जो ठंडक थी न, वो जीभ से होते हुए पेट के साथ-साथ दिलोदिमाग में छा जाती थी। अपनी छोटी सी ट्रिप में ही मैंने ये सारी डिशेज गटका डालीं।

केले के बड़े से पत्ते वाली ये विशाल थाली

इस थाली में आयटम गिनते वक्त खाने से आ रही मनमोहक खुशबू से ही मेरा आधा पेट भर गया था। इस थाली का केंद्र था चावल। अब उस चावल के साथ खाने के लिए दो तरह की सूखी सब्जी, सांभर, दाल, रसम, केले की तरी वाली सब्जी, अचार, केले की चिप्स, बैंगन का भर्ता, रायता दिया गया। इसके साथ ही कटे तरबूज, नींबू-पानी, खुरमे, पापड़ भी परोसे गए। लिस्ट यहीं खत्म नहीं होती, इसके बाद हमें पके कटहल और गुड़ की खीर परोसी गई। और उसके बाद भी फिल्टर्ड कॉफी के फ्लेवर वाली आइसक्रीम। इतना सब कुछ एक आदमी से खाया तो नहीं जाता लेकिन यकीन मानिए मुझे इस थाली को चट करने में कुछ मिनट ही लगे। इतना ज्यादा स्वाद था कि बस रहा ही नहीं गया। अच्छा हां, एक बात जो सीखी मैंने यहां के टेबल एटीकेट्स के बारे में कि थाली खत्म करके पत्ते को तने से मोड़कर रखा जाता है। मतलब केले के पूरे पत्ते को मोड़कर आधा कर दो। 

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कोथू परोटा

परोटा होता है अपने यहां के लच्छे पराठा जैसा एक चीज। उसी को खूब छोटे टुकड़ों में तोड़कर ढेर सारी सब्जियों के साथ पका लिया जाता है, फिर तड़का विद राई एन्ड करी का पत्ता। अब चूंकि मैं शाकाहारी हूं तो  ये वेज कोथू परोटा था, नहीं तो इसमें सब्जी की जगह मीट डाला जा सकता है। हां साथ में ये जो सफेद रंग की वस्तु है वो दही वाले प्याज हैं। जैसे इधर उत्तर भारत में सिरके वाले प्याज का चलन है, उधर इस तरह खाते हैं।

घी पोड़ी डोसाई

चने (अरहर भी चलेगा) को भूनकर, पीसकर, मसालों और मिर्च के ब्लेंड से तैयार किया गया पाउडर होता है पोड़ी। डोसे को यहां डोसाई भी कहा जाता है। डोसे के ऊपर मस्त तैयार पाउडर को घी से एकदम कोट कर दिया जाता है।

बज्जी

ये चेन्नई के बीच पर मिलने वाला पकोड़ा टाइप्स चीज है। बीस रुपए की इस प्लेट में केले, मिर्च और प्याज के आइटम हैं। चटनी में कड़े रेशे वाला कुछ ढेर सारा था। ये मैंने मरीना बीच पर खरीदा था। इन वेज भज्जियों के अलावा समुद्री मछलियों को फ्राय करके बेचा जाता है। इन बीसियों तरीके की मछलियों के अलावा यहां केकड़े, झींगे भी तलकर बेचे जाते हैं।

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इडली-दाल

इडली-सांभर तो अपने जीवन में बहुत खा चुकी थी, इसलिए इस दाल संग परोसी गई इडली पर निगाहें रुक गईं। दाल घी में जीरे और करी के पत्ते साथ तड़का लगाकर छौंकी गई थी। जिन लोगों को सांभर के खट्टेपन से थोड़ी चिढ़ है, उनके लिए ये कॉम्बो मस्त है। मुझे इडली सांभर और दाल, दोनों के साथ ही अच्छी लगी।

तो ये थे मेरे आजमाए कुछ मजेदार तमिल व्यंजन। आप भी घूमने जाइएगा, तो अपनी घुमक्कड़ी की बातें और खाने के अनुभवों को हमारे साथ जरूर शेयर करिएगा।


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