भोपाल के पास ही बनी है एक अलग दुनिया: भीमबेटका की गुफाएं

मध्यप्रदेश के रायसेन जिले में स्थित भीमबेटका में बहुत पुरानी गुफाएं हैं। जहां आदिमानव के समय की शैलाश्रय और भित्तिचित्र मौजूद हैं। भीमबेटका, मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से 45 किलोमीटर दूरी पर है। ये जगह बेहद सुंदर और अद्भुत है। भीमबेटका में 700 गुफाएं हैं। जिसमें से 500 गुफाओ में भित्तिचित्र है। इनमें से कुछ तो लगभग 12,000 वर्ष पुराने बताए जाते हैं। 15 गुफाएं ही लोगों के देखने के लिए खुली हुई हैं। यहां पत्थरों की विभिन्न आकृतियां और भित्तिचित्र एक अलग ही दुनिया का एहसास कराते हैं।

पहला पड़ाव- सलकनपुर

हमारी भीमबेटका यात्रा की शुरुआत सपरिवार अपने गृहनगर सोनकच्छ से हुई। हम सीधे भीमबेटका न जाते हुए पहले सलकनपुर गये। जो विंध्याचल की पहाड़ियों में है, यहां एक दैवीय स्थान है। सलकनपुर सीहोर जिले के नर्सुल्लागंज तहसील में आता है। ये बेहद ही मनोहारी जगह है। जहां विंध्यवासिनी मां जगदम्बा 1,000 फीट की ऊंचाई पर विराजमान हैं।

यहां मां विजयासन देवी की भू प्रतिमा है। यह प्रतिमा माता पार्वती की है। जो वात्सल्य भाव से अपनी गोद में भगवान गणेश को लेकर बैठी हुई हैं। इस भव्य मंदिर में महालक्ष्मी, महासरस्वती और भगवान भैरव की प्रतिमाएं भी हैं। दर्शन करने के बाद परिसर में बने बगीचे में हमने अपना घर से लाया खाना खाया। जब हम खाने खा रहे थे तब वहां बंदरों ने बहुत उत्पात मचाया।

ये भी पढ़ें:  जिभी, तीर्थन घाटी: पहाड़ी स्वर्ग है हिमाचल प्रदेश का ये गांव

पहले तो वे हमारे आसपास घूमते रहे और फिर हमारे भोजन पर टूट पड़े। इस घटना को हमने अपने मोबाइल में कैद किया। भोजन करने के बाद हम अपने अगले पड़ाव भीमबेटका की ओर रुख किया। भीमबेटका, सलकनपुर से 46 किलोमीटर की दूरी पर है। भीमबेटका तक जाने का रास्ता रातापानी के जंगलों से होकर गुजरता है।

भीमबेटका

रातापानी एक वन्यजीव अभ्यारण है। रास्ता बेहद ही घने जंगलो के बीच से होकर जाता है। यहां सागवान के वृक्ष बहुतायत में पाए जाते हैं। करीब एक घण्टे के सफर के बाद हम लोग भीमबेटका पहुंच गये। यहां प्रवेश के लिये हमने हर गाड़ी के लिये 300 रुपये चुकाये। जब हमने अंदर प्रवेश किया उस समय शाम के 5 बज रहे थे। हमें सख्त हिदायत दी गई थी 6 बजे तक वापस लौट आना।

bheembetka

गाड़ी पार्किंग में लगाकर हम पैदल चलने लगे। यहां पर्यटन विभाग द्वारा पक्की पगडंडियों का निर्माण किया गया ह। जिस पर चलते हुए हम आगे बढ़ रहे थे। जगह-जगह पर विभिन्न आकृतियों के बड़े-बड़े पत्थर पड़े हुए थे। ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने इन पत्थरों को तराश कर यहां जमाया है। ये बड़ी चट्टानें किसी तिलिस्मी दुनिया का एहसास करा रही थीं। पहाड़ों के क्षरण से बनी ये आकृतियां प्रकृति की अद्भुत कारीगरी का नायाब नमूना है।

ये भी पढ़ें:  खजुहाः मुगलिया बारादरी-युक्त चारबाग शैली की आखिरी निशानी

यहां बने शैलचित्र आदिमानव काल की अनुभूति कराते हैं। विभिन्न जानवरों, आखेट, और तरह-तरह के चित्र इन गुफाओं में मौजूद हैं। इस स्थान से कुछ ही दूरी पर एक गुफानुमा जगह में एक मन्दिर है। जहां देवी दुर्गा की प्रतिमा है। मंदिर में दर्शन के बाद हम यहां से लौटने लगे क्योंकि हमें 6 बजे तक ही घूमने की अनुमति थी।

यात्रा का समापन भोजपुर की निराशा

भीमबेटका से हम लोगों ने भोजपुर की ओर रुख किया। जो यहां से 22 किलोमीटर की दूरी पर है। भोजपुर पंहुचने में हमें 1 घण्टे का वक्त लगा। रास्ता खराब होने के कारण समय अधिक लगा। भोजपुर में राजाभोज द्वारा बनवाया एक विशाल मंदिर है। जिसमें स्थापित शिवलिंग की गिनती भारत के बड़े शिवलिंग में की जाती है। इसे मध्य भारत का सोमनाथ भी कहते हैं। लेकिन यहां पहुंचकर हमें निराशा ही हाथ लगी क्योकि मन्दिर 6 बजे ही बन्द हो जाता है। हम लोग मंदिर देखने से वंचित रह गये। भोजपुर फिर कभी आने का इरादा कर हम वापस निकल पड़े।

ये भी पढ़ें:  तमिलनाडु का खाना मतलब सादगी, चटख रंग, भरपूर सब्जियां और बेमिसाल स्वाद

ये यात्रा-वृतांत हमें लिख भेजा है लोकेन्द्र चावड़ा ने। लोकेन्द्र चावड़ा मध्य प्रदेश के सोनकच्छ के रहने वाले हैं। पेशे के तौर पर वे रेडीमड कपड़े का व्यवसास करते हैं। अपने बारे में बताते हैं कि इस व्यस्त दिनचर्या में समय निकालकर घूमना-फिरना पसंद है। पुरातन जगहों को देखने में रुचि है। उनका एक सपना है, एक छोटा सा साइकलिंग ग्रुप बनाने का। ताकि सब मिलकर पुरातन स्थलों पर अपनी घुमक्कड़ी करें।


ये भी पढ़ें:

मध्यप्रदेश का वो जिला, जो आज भी 356 क्रांतिकारियों की हत्या पर रो उठता है

Leave a Comment