वो लोकसंगीत जो आज भी भारत, बांग्लादेश को एक कर सकता है

बाउल संगीत, बंगाल की आत्मा है। बाउल गायक ज्यादातर बंगाल के बोलपुर में पाए जाते हैं। शांतिनिकेतन भी बोलपुर में ही है। रवींद्रनाथ टैगोर भी बाउल के मुरीद थे। हर साल अपने घर पर होने वाली कवि सम्मेलन में बाउल गायकों जरूर बुलाया करते थे। बाउल को यूनेस्को ने खतरे में पड़ी विरासत की सूची में डाला है। इतनी महान कला के साधक मुफलिसी में जी रहे हैं। हम अपनी परंपराओं, कलाओं के प्रति इतना उदासीन कैसे हो सकते हैं? फिर लापरवाही के साथ ये भी कहते हैं, इस देश में रखा ही क्या है।


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टैगोर की कर्मभूमि ‘शांतिनिकेतन’ से घूमने से पहले जानें ये बातें

शांतिनेकतन पहुंच जाना, अपने आप में एक सपने के पूरे हो जाने सरीखा होता है। पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में बोलपुर इलाके में बसा है शांतिनिकेतन। शांतिनिकेतन जाकर हर कोई रवींद्रनाथ टैगोर के जीवन को करीब से महसूस करना चाहता है, वो स्कूल देखना चाहता है जहां आज भी बच्चों को पेड़ों के नीचे पढ़ाया जाता है।

कई सारी ऐसी बातें हैं जो आपको वहां जाने से पहले जान लेनी चाहिए। यहां पर आपका गूगल देखे बिना सफर करने वाला दर्शनशास्त्र हानिकारक साबित हो सकता है।


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