दूसरी सदी की एक तकनीक कैसे पैदा कर रही है लाखों रुपए?

सदियों पुराना एक विज्ञान आज इक्कीसवीं सदी में हजारों लोगों के जीवनयापन का स्रोत बन चुका है। एक ऐसी टेक्नीक जो देश के पहाड़ी इलाकों से निकलकर दूरदराज के राज्यों तक फैल गई है। ‘घराट परियोजना’, जिस टेक्नीक को उत्तराखंड के लोगों ने फालतू समझ कर त्याग दिया था, घराटों का इस्तेमाल करना बंद कर दिया था, आज वही घराट ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों में बसे परिवारों के लिए खुशहाली की वजह हैं। घराट को मुख्यधारा में लाने का श्रेय जाता है हेस्को को। हेस्को यानि कि हिमालयन एनवायरमेंटल स्टडीज एंड कंजरवेशन ऑर्जेनाइजेशन। ये उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से संचालित होता है।


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उत्तराखंड के ऋषिकेश, गुप्तकाशी, केदार घाटी में बिताए गए शानदार पल. शहर की बंद हवा से निकलकर पहाड़ों की आगोश में जाना हमेशा उत्साह बढ़ाने वाला है.

जोशीमठ-औली रोपवे है एशिया का दूसरा सबसे लंबा गंडोला टूर

मजेदार जगह है औली और उससे भी मजेदार है, जोशीमठ से औली तक का गंडोले पर सफर। इस रोमांचक रोपवे से गुजरकर जब आप औली की हसीन वादियों में पहुंचते हैं तो अल्लाह कसम, वहां से लौटकर आने का मन तो कतई नहीं करता। लेकिन लौटते वक्त रस्सी पर लटकी चेयरकार से जब सरकते हुए नीचे की तरफ आते हैं तो वापस आने की मजबूरी कम कचोटती है।


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