कर्नाटक: एक प्रयोगवादी राज्य और उसका बहुरंगी खाना

कर्नाटक, एक दक्षिण भारतीय राज्य। जो कि अपने अलहदा संगीत, साहित्य, भोज और संपन्न प्राकृतिक, ऐतिहासिक संपदा से गर्वोन्मुख है। कनार्टक की राजधानी बेंगलुरु में यत्र-तत्र घूमते हुए मुझे लग ही नहीं रहा था कि मैं किसी दक्षिण भारतीय शहर में हूं। यहां पर तकरीबन हर राज्य के लोग टहलते हुए दिख रहे थे। आईटी सेक्टर के तमाम दफ्तरों ने इस शहर को बहुसंस्कृतीय बना दिया है। यहां पर भी किसी मेट्रोपॉलिटन शहर की तरह बड़े-बड़े मॉल्स और सिटिंग स्पेस थे। लेकिन मेरी निगाहें तो कर्नाटक के ऑथेंटिक व्यंजन तलाशने में लगी थीं। पूरा शहर घूम-घूमकर मैंने बड़ी ही स्वादिष्ट चीजें खाईं, जिनका विवरण यहां लिख रही हूं। आप भी पढ़िए, मुंह में पानी आ जाए तो उसकी जिम्मेदारी हमारी नहीं है। और हां, हमारे पेट में दर्द भी नहीं होना चाहिए, ये भी बता दे रहे।

चो चो बाथ

ये ना, एक मिक्स आइटम है। पीले रंग में घी से तर सूजी का हलवा है केसर, मेवे मारकर। भूरे रंग की चीज चने की दाल और टमाटर संग तैयार सूजी का उपमा है। मीठे और नमकीन का कॉम्बिनेशन सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन खाने में जबरदस्त स्वाद आता है। मीठे वाले को केसरी बाथ बोलते हैं और नमकीन वाले को खरा बाथ। ये कर्नाटक में सबसे प्रसिद्ध सुबह के नाश्तों में से एक है।

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तरकारी बिरयानी

बिरयानी का नाम सुनने भर से ही जीभ ललचा जाती है। दुनिया भर में बिरयानी के हजारों वर्जन हैं। अकेले हैदराबाद में ही कई सौ तरीकों से बिरयानी बनाई जाती है। वेज बिरयानी नाम की कोई चीज होती भी है या नहीं, ये वाद-विवाद चलता रहेगा। लेकिन यहां पर बड़े ही सोफिस्टिकेटेड तरीके से इसे तरकारी बिरयानी कहकर पुकारा जाता है। तो मैंने भी लगे हाथ अपने हाथों से तरकारी बिरयानी का आचमन कर लिया। खाने के बाद समझ आया कि लोग वेज बिरयानी के नाम से इतना चिढ़ते क्यों हैं। बस यूं समझिये, इस थाली में सबसे टेस्टी कुछ था तो, वो तड़का लगी हुई सूखी मिर्च है।

मैसूर मसाला डोसा

ये मस्त चीज है। बाकी डोसे जैसा ही बनता है, लेकिन इसकी फिलिंग में कुछ अलग तरह के मसालों के बीच चुकंदर घिस के डाला जाता है। ये थोड़ा अजीब सा लगने वाला ब्लेंड भरपूर चटकारे देता है। साथ में होती है धनिया, मिर्च और राई वाली हरी चटनी। नारियल वाली चटनी तो आवश्यक रूप से हर दक्षिण भारतीय खाने में मौजूद ही रहती है। मैसूर एक राजसी शहर है, जोकि बेंगलुरु से तकरीबन डेढ़ सौ किलोमीटर की दूरी पर है। मैसूर को कर्नाटक की सांस्कृतिक राजधानी का भी दर्जा प्राप्त है।

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मल्लिगे इडली

ये काफी सॉफ्ट होती है, सामान्य से थोड़ी ज्यादा खट्टी। इसके साथ थोड़ा मीठा से साम्भर दिया गया लेकिन साथ की लाल-लाल टमाटर वाली चटनी के चटपटेपन ने इसे बैलैंस कर दिया। इसे जैस्मिन या खुशबू इडली भी बोलते हैं। मल्लिगे का मतलब भी यही होता है।


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