वाराणसी में लड़कियों की आवाज सुन उगता है सूरज

वाराणसी बहुत ही सुंदर शहर है। वाराणसी के सूर्योदय और सूर्यास्त का तो क्या कहना। वाराणसी की हवाओं में ही नशा है। वाराणसी की आरती को देखने के लिए तो लोग देश विदेश से आते हैं, जैसे हम आए थे। सूर्यास्त की आरती तो हम देख ही चुके थे, अस्सी घाट में सूर्योदय की आरती न देखी तो वाराणसी आना अधूरा ही माना जाता है। सूर्योदय की आरती का समय 5-5:30 बजे था। अस्सी घाट हमारे होटल से थोड़ा दूर था। हम 4:30 बजे उठ कर अस्सी घाट की ओर भागे। इतनी सुबह गंगा बहुत शांत और खूबसूरत दिख रही थी। ठंडी ठंडी हवा गालों को छू रही थी। इतनी सुबह उठ कर स्कूल की याद आ गई। स्कूल के लिए ऐसे ही सुबह उठ कर दौड़ लगाते थे।

वाराणसी
वाराणसी का सूर्योदय

वाराणसी का अस्सी घाट:

वाराणसी के अस्सी घाट पर पहुंच कर देखा तो कुछ भी नही था। एक तरफ आरती के लिए मंच लगा था और दूसरी तरफ यज्ञ था। मेरा ध्यान यज्ञ के पास बैठी 10 लड़कियों पर गया, जिनके पास एक महिला बैठी हुई थी। हमारे मन में जिज्ञासा जागने लगी। हम उनके पास गए।लड़कियों के पास एक किताब थी जिसमें से वह पढ़कर कुछ उचारण कर रहीं थी। उनके पास यज्ञ का सामान रखा हुआ था। महिला हवन की तैयारी कर रही थी। मुझे बहुत अजीब लगा, क्योंकि अभी तक किसी भी महिला को मैंने यज्ञ करते हुए नही देखा था।

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वाराणसी
अस्सी घाट की सुबह

वाराणसी में यज्ञ करती गुरूकुल की महिलाएं:

मेरी जिज्ञासा शांत कहां होने वाली थी। हम उनके पास जा कर बैठ गए और बातचीत का सिलसिला शूरू किया। बातों बातों में उन्होंने बताया कि इस घाट के मालिक ने ही उन्हें नियुक्त किया है। वह विशेष गुरुकुल से आईं थी। जहां यज्ञ विधि की शिक्षा ले रही थीं। यज्ञ करने वाली ये पहली महिलां थी जिन्हें मैने देखा था। बातचीत करते वक्त उन्होंने कहा ‘महिलाएं किसी क्षेत्र में पीछे नही हैं और यही कारण है कि वो यहां वाराणसी में यज्ञ करने के लिए राजी हुई हैं।

वाराणसी में महिलाओं को मिला प्रोत्साहन :

‘वाराणसी में यज्ञ के लिए पुरुष भी दावेदार थे,पर घाट मालिक की भी यही इच्छा थी कि महिलाएं इस क्षेत्र में आगे आएं। 6:15 बजे आरती शुरू हुई। सभी लड़कियां अपनी मीठी आवाज में सूर्य को आवाहन देने लगी। ठंडी हवा और मीठी आवाज में सारा माहौल सुहावना बना दिया था। यज्ञ की शुरुआत हुई। सभी लड़कियां मंत्रों का उच्चारण कर रहीं थी। मंत्रों के उच्चारण और घंटियों की आवाज बिल्कुल मेल खा रहे थे। यज्ञ की समाप्ती के साथ वाराणसी का सारा माहौल सुहावना हो गया था।

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वाराणसी: नारी शक्ति का प्रतीक

वाराणसी में आरती के बाद गंगा में से सूर्योदय को देखना आपका दिन बना देता है। मन में बहुत खुशी थी। वाराणसी में लड़कियों का ऐसा बढ़ावा देना मन में खुशी भर देता है। वाराणसी में लड़कियों को मिला ऐसा प्रोत्साहन एक उम्मीद जगा देता है। वाराणसी सच में बहुत लकी शहर है,जहां सुबह की शुरुआत यहां की बेटियों की आवाज के साथ होती है। वाराणसी प्रतीक है नारी शक्ति का। वाराणसी एक उदाहरण है, उन सभी के लिए, जो लड़कियों को कमतर समझते हैं। लड़कियों के लिए वाराणसी का ऐसा प्यार मुझे वाराणसी से और जोड़ देता है।

(यह ब्लॉग ‘चलत मुसाफ़िर’ के साथ इंटर्नशिप कर रहीं पूजा ने संपादित किया है।)

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