अंडमानः कल्पना से परे एक अलौकिक आनंद

चारों तरफ फैला नीला समंदर और उसमें तैरती अनगिनत रंग-बिरंगी मछलियां। कुछ तो आपकी कल्पना से भी कहीं अधिक सुंदर, किनारों पर रेत के मखमली गलीचें। इतने साफ कि मन करता है काश उसे पहन सके।समंदर के किनारों पर दूर तक फैली हरियाली। नीरवता में भी मन के भीतर तक सुनाई देता प्रकृति का मधुर संगीत। हम बात कर रहे हैं अंडमान निकोबार की जो भारत का एक केंद्र शासित प्रदेश है। कुदरती खजाने से भरा ये प्रदेश छोटे बड़े 572 द्वीपों का एक समुह है। उत्तर से दक्षिण तक इसका विस्तार करीब 800 किमी तक फैला है। वैसे अंडमान कैसे जाएं, कहां रुकें और क्या देखें इस बारे में आपकों इंटरनेट पर ढेरों जानकारी मिल सकती है जो काफी उपयोगी भी है लेकिन मैं अपनी अंडमान यात्रा के बारे में आपको कुछ ऐसी बातें बताना चाहूंगी जो हर प्रकृति प्रेमी को जाननी चाहिए।

मेरी अंडमान यात्रा

मैनें इससे पहले कभी समद्र तट नहीं देखे थे इसलिए जब मेरा अंडमान जाने का सपना पूरा होने को आया तो मानों मेरी कल्पनाओं को पंख लग गए । मैं जून 2017 में अंडमान की यात्रा पर अपने परिवार के साथ गई और जैसा सोचा था मैनें अंडमान को उससे कहीं बेहतर और खूबसूरत पाया। हमने अपनी यात्रा अंडमान की राजधानी पोर्टब्लेयर से शुरू की। मैं दिल्ली में रहती हूं। कोलकाता होते हुए हम सबसे पहले पोर्टब्लेयर पहुंचे। अंडमान कितना खूबसूरत है इसकी पहली झलक ही आपको इसकी राजधानी पोर्टब्लेयर की कुदरती खूबसूरती देखकर मिल जाती है। आधुनिक सुख सुविधाओं से लैस पोर्टब्लेयर में आप खुद को रिलैक्स कर एक बेहद रोमांचक यात्रा के लिए खुद को तैयार करते हैं।

हैवलॉक के बीच

पोर्टब्लेयर से हैवलॉक का सफर

अंडमान-निकोबार कई छोटे बड़े खूबसूरत द्वीपों से मिलकर बना है और एक ऐसी ही नैसर्गित जगह है हैवलॉक आइलैंड। पोर्ट ब्लेयर से हैवलॉक तक का सफ़र हमने क्रूज़ के ज़रिए तय किया। अपने 1 घंटे के सफर में हमने समंदर के सुंदर नीले पानी में रंगबिरंगी मछलियों को अठखेलियां करते देखा। और जैसे ही हैवलॉक आइसलैंड की मन मोह लेने वाली हरियाली ने बांहे पसारकर हमारा स्वागत किया, सफर की थकान छू मंतर हो गई। हैवलॉक आइलैंड पर राधास्वामी, एलिफैंटा और विजयनगर जैसे कई बेहद खूबसूरत बीच हैं। राधास्वामी बीच तो एशिया के सबसे खूबसूरत समुद्र तटों में शुमार है। हम राधास्वामी बीच पर लहरों के साथ अठखेलियां कर खुद भी बच्चे बन गए। समंदर की ठंडी और ताजी हवा ने हमें दुनियादारी के तनाव से मुक्त कर एक जादूभरी दुनिया में पहुंचा दिया जहां सब कुछ कितना सरल और सुंदर था। हैवलॉक के एलिफैंटा बीच पर जाकर आप महसूस करते हैं कि अब भी कुछ जगह ऐसी हैं जिन्हें नकारात्मकता ने छुआ नहीं हैं। इस रुहानी सुकून के साथ साथ हमने समुद्र तट के किनारे मिलने वाले स्थानीय खाने का भी खूब मजा उठाया खासकर यहां मिलने वाला नारियल पानी और स्थानीय मसालों के साथ बनी हुई मछली आपको कभी न भूलने वाला जायका देते हैं।

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नील आयलैंड

हैवलॉक आइलैंड से अपने आपको तरोताजा कर हम पहुंचे नील आइलैंड। नील आइलैंड के बीच भीड़ भाड़ से अलग नैसर्गिक सुषमा से लिपटे हुए हैं। चाहे सीतापुर बीच हो भरतपुर बीच या लक्ष्मण पुर आप यहां आकर बाहरी दुनिया का हर आकर्षण भूल जाएंगे। इन समुद्र तटों की मखमल सी रेत पर चलकर मैं दुनिया की सारी तकलीफें भूल गई। समंदर का मीलों फैला अथाह नीला जल और किनारों पर रंगबिरंगी सीपियां । मन अगर मर्तबान होता तो मैं ये सारी अनमोल चीज़ें उसमें भर लेतीं।

अगर पर्यावरण संरक्षण के प्रति थोड़े भी संवेदनशील हैं तो आपको नील आइलैंड के प्राकृतिक रूप से बने हुए नैचुरल रॉक फॉर्मेशन को ज़रूर देखना चाहिए। यहां हमने कई समुद्री जीव देखे जो अंडमान के बाहर आपको देखने को न मिलें।इनमें सी कुकुम्बर, अद्भत किस्म की स्टारफिश और  जीवित शंख आपकों प्रकृति के और करीब ले जाएंगे।

अंडर वॉटर डाइव

रोमांच का अनुभव

चाहे नीलद्वीप हो या रेड स्किन आयलैंड या फिर रॉस आयलैंड आपको अंडमान में हर जगह रोमांच से रूबरू होने का भरपूर मौका मिलता है। आप स्नॉर्कलिंग और स्कूबाडायविंग के ज़रिए समंदर की गहराइयों में जाकर कुदरत की ख़ूबसूरती को बेहद करीब से देख सकते हैं। जब समंदर के भीतर रंगों का इंद्रधनुष आप की आंखों के सामने से गुजरता है आपको छूकर, तब आपको अहसास होता है अरे ये तो चंचल मछलियां हैं जो कभी अपनी बेइंतहा खूबसूरती पर इतरा रही होती हैं और कभी अपनी चपलता से आपको मंत्रमुग्ध कर देती हैं। इन दोनों ही रोमांचक गतिविधियों के लिए आपको तैराकी में प्रशिक्षित होना ज़रूरी नहीं है। आपके साथ एक पेशेवर ट्रेनर होता है जो आपको समंदर के भीतर जाने से पहले अच्छी तरह ट्रेन करता है और समंदर के अंदर भी साये की तरह आपके पीछे रहता है ताकि आप समंदर की खूबसूरती का  निश्चिंत होकर मजा ले सकें।

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जॉली आयलैंड तक बोट का सफर

नील आइलैंड के बाद हमारा अगला पड़ाव था जॉली बॉय। नील आइलैंड से क्रूज़ के ज़रिए एक बार फिर हम जॉली बॉय पहुंचे। लेकिन उससे पहले हमने वांडूर में महात्मा गांधी नैशनल सी पार्क में समुद्री जीवन को नज़दीक से जानने की कोशिश की। यहीं आकर हमें समुद्री राय डुगौंग के बारे में पता चला जो अंडमान का राज्य पशु है। डुगौंग पूरी तरह से शाकाहारी प्राणी है और गाय की तरह ही यहां के पारिस्थिक संत्र में बेहद अहम भूमिका निभाती है। जैव संरक्षण और समदंर की खूबसूरत दुनिया को एक नए नजरिए से देखने की प्रेरणा देता है ये नैशनल पार्क।

बीच का मजा लेता मेरा बेटा

वांडूर से बोट के जरिए हम जॉली बॉय आइलैंड पहुंचे। जॉली बॉय पर कोई आबादी नहीं रहती। यहां पर्यटक और सामान बेचने वाले सभी बोट के ज़रिए आते हैं और शाम को वापस लौट जाते हैं। जॉलीबॉय में आप खूबसूरत कोरल रीफ को बेहद करीब से देख सकते हैं। यही नहीं स्नॉर्कलिंग और स्कूबा डायविंग के ज़रिए एक बार फिर हमने समुद्र के कुछ अनछुए पहलुओं को देखा। मैनें यहां स्नॉर्कलिंग को बहुत इंजॉय किया और नीमों फिश को जब मैनें अपने हाथों से छुआ तो यकीन मानिए खुशी के मारे में रो पड़ी। मगर समंदर के पानी में मेरे आंसू नीमों फिश को नहीं दिखे। जॉली बॉय द्वीप पर एक प्राकृतिक रास्ता भी है जो जंगल के भीतर तक आपको ले जाता है । मैं जब इस सूनसान मगर बेहद खूबसूरत रास्ते से होकर गुजरी तो मुझे बिल्कुल डर नहीं लगा क्योंकि प्रकृति मां की गोद में उसके बच्चे भला डर कब महसूस करते हैं।

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अंडमान-निकोबार आकर आप किसी भी मायने में पछताएंगे नहीं बल्कि एक सकारात्मक ऊर्जा से भर जाएंगे। इस ऊर्जा को आप भले ही अपने सूटकेस या किसी मर्तबान में भर कर न ले जा सकें पर आपके मन की तिजोरी में यह अनमोल पल और ऊर्जा मोती की तरह सुरक्षित रहेंगे। यादों के इन अनमोल मोतियों की माला आप जब भी पहनेंगे तो अपने आपको एक बेहद खुश, खूबसूरत और संतुष्ट इंसान के रूप में पाएंगे। तो जाइए..अंडमान आपको बुला रहा है।


ये स्टोरी हमें लिख भेजी है रजनी सेन ने। पिछले 11 सालों से मीडिया में हैं। लिखने का बड़ा शौक है। कविताएं इन्हें ऊर्जा देती हैं। सच्ची यायावर हैं। भले ही दफ्तर के संघर्ष हों या घर का आलस भरा माहौल, इनका मन घूमता ही रहता है। कभी बादलों के पार, कभी समुद्र तटों पर तो कभी किसी पेड़ की टहनी पर। सही मायनों में यह कुदरत की अल्हड़ बच्ची हैं जो उससे मिलने के लिए हमेशा तैयार रहती हैं।

 


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