द्वितीय केदार: Madhyamaheshwar Temple

प्रथम केदार के दर्शन करने के बाद अब हम चलते हैं द्वितीय केदार यानी Madhyamaheshwar Temple। समुद्र तल से 3490 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर बहुत ही भव्य दिखता है। कम प्रचलित होने की वजह से मंदिर भक्तों की भीड़ से काफी दूर है। सिर्फ उत्तराखंड के गढ़वाल मण्डल के यात्री ही यहां दर्शन कर पाते हैं। तो चलिए आपको बताते हैं कैसी थी मेरी Madhyamaheshwar Temple की यात्रा।

Madhyamaheswar Temple
Madhyamaheswar Temple

हमारी यात्रा शुरू हुई थी श्रीनगर गढ़वाल से। सुबह तड़के हम अपनी पूरी तैयारी के साथ 11 लोगों की टीम लिए निकल पड़े। श्रीनगर से मैक्स बुक करवा कर हम पहुुंचे रांसी गांव। Madhymaheshwar Temple का ट्रेक Kedarnath Temple जितना प्रचलित नहीं है। इसी वजह से यहां रहने की कोई खास व्यवस्था नहीं थी। इसकी जानकारी हमने यहां आने से पहले ही पता कर ली थी। रांसी गांव में एक दुकान थी जहां टेंट, मैट और स्लीपिंग बैग्स किराये में आसानी से मिल गए। गिनती के 11 लोगों के अनुसार हमने रुकने का साधन समेटा और निकल पड़े ट्रेक पर।

कैसा था Madhyamaheswar Temple का ट्रेक?

रांसी से Madhyamaheshwar Temple का ट्रेक 18 किलोमीटर का है। शुरुआती 6 किलोमीटर का ट्रेक एकदम समतल और सीधा है। इस 6 किलोमीटर की दूरी को तय करके रांसी से गोंडार गांव तक पहुंचते हैं। इसी बीच आपको एक बहुत ही सुंदर सा झरना भी देखने को मिलेगा। झरने का रंग दूध सा सफेद और उसका पानी एकदम ठंडा और साफ। आसपास मन लुभाती हरियाली और ऊंचे ढाल से पहाड़ देखने को मिलेंगे। गोंडार से आगे का ट्रेक थोड़ा मुश्किल होता जाता है। यहां कच्चे रास्ते और खड़ी चढ़ाई से होकर गुजरना होता है।

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गोंडार में हमने रिफ्रेश होकर आगे के लिए ट्रेक करना शुरू किया। करीब दो किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई के बाद हम पहुुंचे बंतोली गांव। वहां हम सब कुछ देर और ठहरे और कुछ तस्वीरें भी ली। ज्यादा देर ना रुकते हुए हमने आगे निकलने का फैसला किया। है। हमारा इरादा एक ही दिन में ट्रेक पूरा करने का था।

बंतोली से चार किलोमीटर और ट्रेक करते हुए हम पहुुंचे नानू गांव। यहां पहुंचने तक अंधेरा छा चुका था। गांव वालों ने हमें आगे की चढ़ाई करने के लिए साफ मना कर दिया। उनका कहना था कि उपर कुछ जंगली जानवर रहते हैं जैसे गुलदार और भालू। इसके साथ कुछ डरावनी कहानियां भी उन्होंने हमारे कानों में फूक दी थी। कुछ वक्त तक हम सब सोच में पड़ गए और रात नानू गांव में ही बिताने का सोचने लगे। लेकिन नहीं, हमने तो ट्रेक बिना रुके पूरा करने का निश्चित किया था। तो हम सब चल पड़े आगे की ओर।

अंधेरा छा चुका था और गांव वालों की कहानियों से हम थोड़ा डर तो गए ही थे इसिलिए हम सब लोग एक साथ झुंड बना कर चलने लगे। दूर दराज से हमें जंगली जानवरों की आवाजे भी आ रही थी। लेकिन हम फिर भी चलते रहे और इस तरह हम मैखम्बा गांव पहुंच चुके थे। चूंकि हम सुबह से सफर कर रहे थे तो हमने वहां पर थोड़ा आराम करने का सोचा। कुछ देर के लिए मैं एक सीढ़ीनुमा रास्ते पे बैठी गयी। जब मैंने अपनी नजरें आसमान की तरफ उठाई तो हैरान रह गई। खुला आसमान तारों से खाचखाच भरा हुआ था। हम इतनी ऊंचाई पर थे मानो आसमान हमारी मुट्ठी मे आ जाएगा। अंधेरे में भी आपको सुंदर नजारे देखने को मिल जाएं तो ये आपका सच मे सौभाग्य है।

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कुछ देर वहां पर बैठे आसमान को निहारने के बाद हमने फिर से ट्रेकिंग शुरू कर दी। चार किलोमीटर और ट्रेक करने के बाद , करीब रात एक बजे हम Madhyamaheshwar Temple पहुंचे। रात को दर्शन होना मुमकिन ही नहीं था तो हमने अपने-अपने टेंट लगा लिए। हम अपने साथ मैगी और एक बड़ा पतीला लेकर गए थे ताकि हमें खाने की दिक्कत न हो। वहां पहुंच कर हमने मैगी बनाई और भूख मिटाने के बाद हम सो गए।

Madhyamaheshwar Trek
Madhyamaheshwar Trek

पहाड़ों मे अलार्म की जरूरत नहीं होती, विभिन्न प्रकार की पक्षियों की चहचहाट आपको समय पर उठा देगी। एक ऐसे समय पर, जहां से आप मौसम का हर रंग आसानी से देख पाएंगे। जैसे ही हमारी नींद खुली तो हमारी आंखों के सामने उगता हुआ सूरज सोने सा चमक रहा था। रात भर ट्रेक की थकान और पैरो का दर्द, उस नजारे को देख कर मैं यह सब भूल गयी। कुछ देर उस नजारे को निहारने के बाद मैं फ्रेश होने चली गई। उसके कुछ देर बाद ही हमने मध्यमहेश्वर नाथ के दर्शन किए।

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Madhymaheshwar Temple की बनावट Kedarnath Temple से मिलती जुलती है। जब भैंस रूपी शिव के टुकड़े हुए थे तो उनकी नाभि का हिस्सा मध्यमहेश्वर मे आकर गिरा था। गर्भगृह में आपको एक शीला दिखाई देगी जो नाभी के आकार की है। हमने मंदिर में दर्शन किए, पूजा की और कुछ देर बाद सकरात्मक ऊर्जा से खुद को भरा पुरा पाया। मंदिर के आसपास बहुत सुंदर और पुरानी बनावट के घर हैं। भक्तिभाव से भरा हुआ माहौल और आसपास हरे भरे बुग्याल भी आपको देखने को मिलेंगे।

Madhyamasheshwar Temple से करीब डेढ़ किलोमीटर और चढ़ाई करके आपको बुढ़ा मध्यमहेश्वर के दर्शन करने को मिलेंगे। उस मंदिर के आसपास सुंदर सा तालाब और उसके एकदम सामने आपको हिमालय श्रृंखला नजर आएगी। जिसमें से आपको चौखंबा चोटी बहुत नजदीक दिखाई देगी। पंच केदार में से ये द्वितीय केदार का ट्रेक आपको वाकई मे बहुत पसंद आएगा। वातावरण के सौंदर्य से भरपूर इस ट्रेक का आनंद आप भी जरूर उठाएं।

कैसे पहुुंचे Madhyamaheshwar Temple?

शुरुआत में आपको ऋषिकेश पहुंचना होगा जो की आप बस या ट्रेन के जरिये पहुंच सकते हैं। ऋषिकेश से आपको उखीमठ की बस पकड़नी होगी और उखीमठ से आपको रांसी गांव के लिए आसानी से मैक्स मिल जाएगी। फिर रांसी गांव से आप ट्रेक करके Madhyamaheshwar Temple पहुंच सकते हैं।


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