चतुर्थ केदार: Rudranath Temple

तीनों केदार के दर्शन के बाद हम जा पहुुंचे चतुर्थ केदार यानी Rudranath Temple। हालांकि रुद्रनाथ की ऊंचाई बाकी तीन केदार से कम है लेकिन ट्रेक सबसे लंबा। रुद्रनाथ समुद्र तल से 3559 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और इसका ट्रेक 24 किलोमीटर लंबा है। रुद्रनाथ ट्रेक में आपको सबसे ज्यादा खूबसूरत नजारे भी देखने को मिलेंगे। तो चलिए आपको ले चलते है चतुर्थ केदार, रुद्रनाथ।

Rudranath Temple
Rudranath Temple

कैसे हुई हमारी Rudranath Temple यात्रा की शुरुआत?

Rudranath Temple जाने के लिए हम सबसे पहले पहुुंचे ऊखीमठ। ऊखीमठ से हमने सगर गांव के लिए टैक्सी ली क्योंकि ट्रेक सगर गांव से ही शुरू होता है। सगर गांव से हमने 2 किलोमीटर का ट्रेक किया जहां हमको एक पाठशाला दिखी। उसी पाठशाला के पास एक छोटा सा ढाबा हमें मिला जहां हमने आराम किया और थोड़ी पेट पूजा भी की। जितना सुना था रुद्रनाथ ट्रेक के बारे में उससे कई ज्यादा सुंदर हमको दिख रहा था। पाठशाला से हमने फिर से ट्रेक करना शुरू किया और धीरे धीरे हम आगे की ओर बढ़ने लगे।

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रुद्रनाथ में दिन मे एक बार बारिश तो आती ही है। बारिश की वजह से ट्रेक में कहीं कहीं बहुत फिसलन भी आपको मिल सकती है। हम भी इसी फिसलन को जैसे तैसे झेलते हुए आगे बढ़ते चले गए। करीब 8 किलोमीटर और चलने के बाद हमें मिला पुंग बुग्याल। दिखने में बिल्कुल हरा भरा आस पास शुद्ध वातावरण। हमें पुंग बुग्याल तक पहुंचते हुए शाम हो चुकी थी। रात को ट्रेक करना खतरा साबित हो सकता था क्योंकि यहां जंगली जानवरों की तदात ज्यादा है। हम इस ट्रेक में टेंट लेकर नहीं गए थे तो हमें अपने रुकने का इंतजाम भी करना था। हमने सुना था कि पनार बुग्याल में कुछ कुटिया हैं जहां यात्री के रुकने का प्रबंध होता है। तो हम निकल पड़े पनार बुग्याल की तरफ।

पुंग से पनार बुग्याल तक का रास्ता पूरे ट्रेक का सबसे कठिन रास्ता था। एकदम खड़े पहाड़ पर खड़ी चढ़ाई करना बहुत मुश्किल होता जा रहा था। लेकिन चलना भी जरूरी था क्योंकि रुकने का साधन भी देखना था। जैसे तैसे थके हारे हम पहुुंचे पनार बुग्याल और वहां पर एक बाबा जी की कुटिया थी। उसी कुटिया में खाने और रहने की व्यवस्था रहती है। हमने अपनी रात उस ही कुटिया में बितायी।

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पित्रधार
पित्रधार

अगली सुबह हमने मंदिर के लिए चार किलोमीटर का ट्रेक करना था। हमने जल्दबाजी नही करी। धीरे धीरे फ्रेश होकर आगे की ओर बढ़ने लग गए। पनार बुग्याल से दो किलोमीटर की दूरी पर आता है पित्रधार। पित्रधार ऐसी जगह है जो कि आपको इत्मिनान से बैठ जाने पर मजबूर कर देगी। यहां आपको बादलों के विचित्र से खेल दिखेंगे। पल भर में बादल अपने रूप बदलते हैं। हम यहां पर काफी देर तक शांति से बैठ गए थे। कुछ देर यहां आराम करने के बाद हम मंदिर की ओर बढ़ने लगे। करीब दो किलोमीटर की और चढ़ाई के बाद हम मंदिर पहुंच चुके थे। मंदिर की बनावट पिछले तीन केदार से बिल्कुल अलग है। ट्रेक रूट लंबा होने के कारण यहां कम ही लोग पहुंच पाते है। इस वजह से यहां पर आपको भीड़ नही दिखेगी। गर्भ गृह मे हमने देखा नेत्रों के आकार की शीला स्थापित थी। बिल्कुल वैसी ही जैसी कथा में विस्तारित की गई थी।

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गर्भ गृह के अंदर आप ध्यान भी लगा सकते हैं। कई लोग रुद्रनाथ सिर्फ ध्यान लगाने के ही मकसद से जाते है। प्रकृति की गोद में और शिवालय के आंचल से बेहतर ध्यान शायद ही कहीं हो पाये। चूंकि ट्रेक बहुत लंबा है तो एक ही दिन में वापसी भी संभव नही हो पाती है। आप चाहें तो रुद्रनाथ मंदिर के आसपास भी रुक सकते है। आपको यहां पर कुटिया भी मिल जाएंगी।

कैसे पहुुंचे Rudranath Temple?

पहले आप बस या ट्रेन के जरिये ऋषिकेश पहुचेंगे। फिर ऋषिकेश से आपको ऊखीमठ के लिए बस पकड़नी होगी। ऊखीमठ पहुंचनें के बाद आप मैक्स बुक करके सगर गांव जा सकते हैं। सगर से 24 किलोमीटर का ट्रेक करने के बाद आपको रुद्रनाथ बाबा के दर्शन हो जाएंगे।


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