अंतिम केदार: Kalpeshwar Mahadev

अब तक आपको हमने दर्शन करवाये चारों केदार के। अब आपको ले चलते हैं पंचम केदार Kalpeshwar Mahadev की ओर। यहां भगवान शिव की जटाओं की पूजा की जाती है। यहां तक पहुंचने में आपको बाकी केदार जितना लंबा रास्ता नहीं नापना पड़ेगा। आइये जानते हैं पंचम केदार के बारे में।

Kalpeshwar Mahadev
Kalpeshwar Mahadev

कैसा था Kalpeshwar Mahadev का सफर?

पंचम केदार जाने के लिए बहुत ज्यादा वक्त हमें नहीं लगा। श्रीनगर से बस के जरिये हम देवग्राम गांव तक पहुंचे। मंदिर जाने का रास्ता देवग्राम से ही शुरू होता है। देवग्राम पहुंचने के बाद हम निकल पड़े मंदिर की ओर। मंदिर तक पहुंचने के लिए करीब एक किलोमीटर की गुफा से होकर गुजरना पड़ता है। गुफा बहुत ही ठंडी सी रहती है। उस गुफा को पार करते वक्त जितना मजा हमें आ रहा था उतनी ही ठंड भी लग रही थी। गुफा से निकलने के बाद हम बाबा अंतिम केदार, Kalpeshwar Mahadev के सामने थे। मंदिर का आकार बेहद छोटा था लेकिन भव्यता से परिपूर्ण था। मंदिर के आस पास कई लोग ध्यान में बैठे हुए थे। उन सबको देख कर अपना मन भी जैसे शांत होने लगा था।

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हमने कल्पेश्वर महादेव के दर्शन किये और कुछ देर वहीं बैठे रहे। जब हमने वहां के पंडित जी से बात करी तो उन्होंने हमें मंदिर का एक और रास्ता बताया। चतुर्थ केदार Rudranath Temple की ट्रेक के वक्त पित्रधार नामक जगह का जिक्र हुआ था। ये वही जगह है जहां से हम कल्पेश्वर महादेव की तरफ पैदल भी आ सकते है। रास्ता थोड़ा लंबा जरूर होगा लेकिन नजारे बहुत सुंदर देखने को मिलेंगे।

क्या है Kapleshwar Mahadev की मान्यता?

Kalpeshwar Mahadev से जुड़ी हुई कई सारी कहानियां हैं। कहते हैं यहां देवराज इंद्र तपस्या किया करते थे। साथ ही साथ अन्य ऋषि मुनियों की भी यही तप भूमि थी। असुरों के अत्याचार से तंग आकर देवताओं ने भी यहां पर शिव की स्तुति की थी। ये भी कहा जाता है कि यहां बैठ कर शिव जी ने समुद्र मंथन की योजना बनाई थी।

कैसे पहुुंचे Kalpeshwar Mahadev?

सबसे पहले आपको ऋषिकेश पहुंचना होगा जो की बस या ट्रेन के जरिये आसानी से पहुंचा जा सकता है। यहां से आपको देवग्राम गांव के लिए बस मिल जाएगी। देवग्राम पहुंच कर किसी भी लोकल वाहन से आप मंदिर पहुंच सकते हैं।

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